
UCC से अलग रहेगा एमपी के जनजातीय समुदाय (Photo Source- Patrika)
UCC In MP :मध्य प्रदेश के सभी जनजातीय समुदाय को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से अलग रखा जाएगा। उन्हें अपने पारंपरिक रीति - रिवाज मानने की पूरी स्वतंत्रता दी जाएगी। देश की राजधानी दिल्ली में सीएम डॉ. मोहन यादव ने यह घोषणा की। बुधवार को वे यहां एक निजी कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान सीएम ने देश में एक निशान, एक विधान और एक कानून की पैरवी करते हुए कहा, इस राष्ट्रीय भावना में कुछ भी गलत नहीं है। सीएम ने कहा, यूसीसी को लागू करने मध्यप्रदेश सरकार भी तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने गुजरात में लागू प्रावधान का जिक्र करते हुए मप्र में भी यूसीसी में जनजातीय समुदाय को इससे अलग रखने की बात कही।
आपको बता दें कि, यूसीसी के लिए हाईकोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति समीक्षा कर रही है। अन्य प्रदेशों के प्रावधानों के अध्ययन के साथ मप्र की जरूरतों पर सभी वर्ग से राय ली जा रही है। सीएम डॉ. यादव ने कहा, हम प्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए खुले विचार और खुले हृदय के साथ काम करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले पर अब बड़ा बयान देते हुए कहा कि, देश में एक कानून लागू होना बेहद जरूरी है। इस राष्ट्रीय भावना में किसी भी तरह की कोई बुराई नहीं दिखती है। देश के तीन राज्य पहले ही अपने यहां UCC लागू कर चुके हैं। अब मध्य प्रदेश सरकार भी इस दिशा में बहुत तेजी से काम करेगी। बहुत जल्द हमारा मध्य प्रदेश भी UCC लागू करने वाला राज्य बन जाएगा।
सरकार ने इस बड़े काम के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है। इस कमेटी की कमान सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना देसाई को सौंपी गई है। यह कमेटी अब जिला स्तर पर जाकर सभी वर्गों से बात करेगी। कमेटी सभी लोगों से मिलकर उनकी राय और सुझाव इकट्ठा कर रही है। जनता की राय के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। सरकार चाहती है कि इस कानून में सबकी मर्जी शामिल हो सके। किसी भी वर्ग के साथ कोई भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात आदिवासियों से जुड़ी है। सीएम मोहन यादव ने साफ किया कि जनजातीय समाज इससे बाहर रहेगा। आदिवासी समाज के लोग अपने पारंपरिक रीति-रिवाज मानते रहेंगे। नए कानून से उनके पुराने नियमों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार उनके हक और संस्कृति की पूरी तरह रक्षा करने वाली है। आदिवासियों को अपनी परंपराएं निभाने की पूरी आजादी पहले जैसी मिलेगी।
मध्य प्रदेश सरकार इस मामले में गुजरात के फॉर्मूले पर काम कर रही है। गुजरात में भी जनजातीय समुदाय को ऐसी ही बड़ी छूट दी गई है। डॉ. मोहन यादव ने खुद इस बात का भरोसा जनता को दिलाया है। सरकार का मानना है कि आदिवासियों की संस्कृति बहुत अनोखी होती है। इसलिए उनकी परंपराओं के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। यह फैसला राज्य के लाखों आदिवासी परिवारों के लिए बड़ी राहत लाया है।
भारत के तीन राज्यों में समान नागरिक संहिता पर काम हो चुका है। उत्तराखंड इस कानून को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था। उसके बाद अन्य राज्यों ने भी इस दिशा में कदम आगे बढ़ाए। अब मध्य प्रदेश भी इसी नक्शेकदम पर आगे बढ़ने को तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इसे लेकर ड्राफ्ट तैयार किया जा सकता है।
इस बड़े फैसले के कई सियासी और सामाजिक मायने निकाले जा रहे हैं। विपक्ष लगातार आदिवासियों के अधिकारों को लेकर सरकार पर सवाल उठाता था। सीएम के इस बयान ने विपक्ष के सभी आरोपों को शांत कर दिया है। सरकार ने विकास के साथ-साथ संस्कृति बचाने का भी संदेश दिया है। अब देखना होगा कि कमेटी अपनी रिपोर्ट कब तक सौंपती है।
Updated on:
04 Jun 2026 08:57 am
Published on:
04 Jun 2026 08:57 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
