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AIIMS भोपाल में बीमारी की वेटिंग, पेट दर्द अभी हो रहा, सिटी स्कैन होगा 4 महीने बाद

AIIMS Bhopal : एम्स में मरीजों की जांच की लंबी - लंबी कतारें लगी हुई हैं। प्रसूताओं को सोनोग्राफी के लिए तीन महीने बाद की तारीख दी जा रही है।

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AIIMS Bhopal

AIIMS भोपाल में बीमारी की वेटिंग (Photo Source- Patrika)

AIIMS : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सबसे भरोसेमंद अस्पताल कहे जाने वाले एम्स के भी हाल बुरे हैं। या यूं कहें कि, रेलवे की तर्ज पर यहां भी वेटिंग की प्रथा जोर - शोर से चल रही है। जिस तरह रेल टिकट बुक करने पर यात्री को वेटिंग दी जाती है, उसी तरह एम्स में भी जांच के लिए वेटिंग दी जा रही है। यहां हर रोज हजारों मरीज अपने इलाज के लिए पहुंचते हैं। फिर, जब डॉक्टर से मिलते हैं तो वो जांच लिखता है। जब जांच कराने जाते हैं तो पता चलता है कि, वहां वेटिंग चल रही है। वो भी कोई ऐसी वैसी नहीं कई बार तो बीमारों को 4 महीने तक का नंबर दे दिया जाता है।

बीमारी से परेशान मरीज के लिए और परेशानी। लिहाजा वह दवाइयां लेकर अपने घर चला जाता है। आलम ये है कि, मरीजों को चार - चार महीने बाद की डेट दी जा रही है। यहां तक कि प्रसूताओं को भी सोनोग्राफी के लिए तीन - तीन महीने बाद की तारीख दी जा रही है। ऐसे में होता ये है कि, जांच कराने वाले मरीजों में से कुछ तो रिपोर्ट उठाने भी नहीं आते, क्योकि कई मामलों में मरीज की जान भी जा चुकी होती है।

ये मामले बने उदाहरण

केस स्टडी 1: इमरजेंसी में सीटी स्कैन की तारीख 3 सितंबर: कोलार निवासी 40 वर्षीय श्रुति 27 अप्रैल को गॉल ब्लाडर में स्टोन का उपचार कराने एम्स के सर्जरी विभाग में गईं। डॉक्टर ने फॉर्म पर इमरजेंसी में सीटी स्कैन की सलाह दी। सीटी स्कैन विभाग ने 3 सितंबर की तारीख दे दी। जब जल्दी करने का निवेदन किया तो स्टाफ बोला, अर्जेंट लिखा है, इसलिए सितंबर की तारीख मिली है, वरना 6 महीने इंतजार करना पड़ता।

केस स्टडी 2: पेट दर्द, लेकिन जांच के लिए 3 महीने का इंतजार: ओबैदुल्लागंज में रहने वाले 32 वर्षीय प्रवीण (बदला हुआ नाम) लगातार पेट दर्द और वजन घटने की शिकायत लेकर एम्स आईं थी। डॉक्टर ने गंभीर रोग की आशंका में दवा के साथ तत्काल एमआरआई कराने की सलाह दे दी। लेकिन, जांच की तारीख 17 अगस्त मिली।

केस स्टडी-3: कमर दर्द की परेशानी, 4 महीने बाद मिली जांच की तारीख: सीहोर के 38 वर्षीय रमेश अहिरवार (परिवर्तित नाम) को महीनों से कमर दर्द, बुखार और पैरों में कमजोरी की शिकायत थी। एम्स के डॉक्टरों ने स्पाइन टीबी की आशंका जताते हुए तत्काल एमआरआई कराने की सलाह दी। लेकिन उन्हें भी 4 महीने बाद की तारीख मिली। रिपोर्ट आने और दोबारा डॉक्टर को दिखाने तक बीमारी बढ़ चुकी थी।

केस स्टडी-4: सिरदर्द की समस्या के लिए भी तीन महीने बाद जांच: विदिशा की 49 वर्षीय उषा शर्मा (बदला नाम) को लगातार सिरदर्द, चक्कर और धुंधला दिखाई देने की समस्या थी। न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ ने ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी की आशंका को देखते हुए एमआरआइ कराने की सलाह दी। लेकिन उन्हें जांच के लिए तीन महीने इंतजार करना पड़ा। रिपोर्ट मिलने तक उनकी परेशानी बढ़ती रही।

इधर, जेपी व अन्य अस्पतालों में झटपट जांच और रिपोर्ट

भोपाल एम्स में भले ही जांच में देरी हो रही हो, लेकिन शहर के जेपी और अन्य अस्पतालों में ऐसी स्थित नहीं है। भोपाल के जय प्रकाश जिला अस्पताल में एक ही दिन में एमआरआई जांच हो जाती है और जांच के महज 02 घंटे बाद रिपोर्ट भी मिल जाती है।

मरीजों की संख्या से बढ़ रही वेटिंग

एम्स भोपाल के अधीक्षक डॉ. विकास गुप्ता का कहना है कि, एम्स में जांच की वेटिंग खत्म करने का कोई समाधान नहीं है। एमआरआई की दो मशीनें हैं। एक जांच करने में एक घंटा लगता है। रोजाना ओपीडी में 6 हजार मरीज आते हैं। एक प्रतिशत को एमआरआई जांच प्रीस्क्राइब किया गया तो 60 मरीज की जांच करनी होगी और दो मशीनों से 45 से 48 लोगों की ही जांच हो सकती है। कितनी भी मशीन लगा दी जाएं। ये समस्या समाप्त नहीं हो सकेगी।