भोपाल

‘मेरी तबीयत गंभीर थी, हाथ फेरते ही ठीक…’, नीम करोली बाबा के पोते ने बताया रोचक किस्सा

Neem Karoli Baba: हनुमान भक्त नीब करौरी बाबा इन दिनों फिल्म ‘हनुमान अंश’ के कारण चर्चा में हैं, जिनकी अस्थि कलश भोपाल के अरेरा कॉलोनी में उनके पोते धनंजय शर्मा के घर सुरक्षित है।
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Sep 11, 2026
नीब करौरी बाबा पोते धनंजय शर्मा (Photo Source - Patrika)
नीब करौरी बाबा पोते धनंजय शर्मा (Photo Source - Patrika)

Neem Karoli Baba: इन दिनों हनुमान भक्त नीब करौरी बाबा चर्चा में हैं। दावे के अनुसार उनके जीवन पर बनी फिल्म हनुमान अंश का रेकॉर्ड प्रदर्शन जारी है। नीब करौरी बाबा का भोपाल से दिलचस्प नाता जुड़ा हुआ है। केवल यह नहीं कि वह यहां आए थे और इसकी आवोहवा के मुरीद हो गए थे। बल्कि उनसे जुड़ी विरासत अस्थि कलश के रूप में भोपाल में संरक्षित है। दरअसल, उनके पोते धनंजय शर्मा 53 साल पहले इस अस्थि कलश को लेकर भोपाल आए थे और स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए घर पर इसे विराजित कर लिया।

भोपाल में संरक्षित है अस्थि कलश

धनंजय वर्तमान में ई-4 अरेरा कॉलोनी में परिवार के साथ रहते हैं। उन्होंने बताया कि मध्य भारत के गर्वनर रहे भगवान सहाय और पूर्व राष्ट्रपति डॉ शंकरदयाल शर्मा सहित कई हस्तियां नीब करौरी बाबा के अनुयायी थे। जिनके बुलावे पर भोपाल आए थे। वे बताते हैं कि 1957 और 1970 में अरेरा कॉलोनी में वे दस दिन रूके थे। इसके तीन साल बाद 11 सितंबर 1973 में उन्होंने वृंदावन में देह त्यागी थी। उस समय 12 अस्थि कलश बनाए गए थे, उसमें से 11 कलश का विसर्जन किया गया था, धनन्जय बताते हैं कि उनके पिता अनेग सिंह (बाबा के बड़े पुत्र) एक कलश अपने साथ भोपाल लाए और घर पर उसे संरक्षित कर लिया। तब से परिवार की थाती की तरह यह सुरक्षित है।

बाबा ने ही दिया था मुझे नाम

डॉ धनंजय शर्मा ने बताया कि बाबा नीब करौरी का उनसे बहुत स्नेह था। 11 जुलाई 1957 को मेरा जन्म हुआ था और उसी दिन बाबा भोपाल आए थे। मेरा नाम उनका दिया हुआ है। जब वे तीन चार साल के थे उस वक्त तबीयत बहुत खराब हो गई थी, स्थिति गंभीर थी, घर के सब लोग घबरा गए थे, तब चिट्टी से बाबा को सूचित किया, उन्होंने आगरा बुलाया।

वहां पहुंचने पर उन्होंने मेरे सिर पर हाथ फेरा और कहा कि यहां डॉक्टर सहाय को दिखा लें, जब परीक्षण किया तो पूरी तरह सामान्य था। बचपन में छुट्टियों में अक्सर आगरा या अकबरपुर जाते थे, उस वक्त उनका आशीर्वाद मिलता था। फिल्म को लेकर उन्होंने बताया कि इसे परिवार के साथ देखा तो अच्छा लगा। उसे देखकर सभी गदगद हुए। बहुत अच्छा फिल्मांकन किया है। फिल्म जब सेंसर बोर्ड में गई थी, उस वक्त मुझे फोन आया था। यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि इस फिल्म को इतना पसंद किया जा रहा है।

Updated on:
11 Sept 2026 12:54 pm
Published on:
11 Sept 2026 12:53 pm