भोपाल

Bhopal New Bypass 35.611 किमी. बायपास पर आपत्ति, 15.3 किमी हिस्सा संवेदनशील, 25 सितंबर को होगी सुनवाई

South-West Bypass Ring Road: रतनपुर से फंदा तक प्रस्तावित 35.611 किमी दक्षिण-पश्चिम बायपास रिंग रोड के मौजूदा अलाइनमेंट पर पर्यावरणीय आपत्तियां दर्ज हो रही हैं, जिसमें कई बड़े नुकसान सामने आ रहे हैं।
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Sep 17, 2026
बायपास का निर्माण, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
बायपास का निर्माण, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

Bhopal news: मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में रतनपुर सड़क से फंदा तक प्रस्तावित 35.611 किलोमीटर लंबे दक्षिण-पश्चिम बायपास रिंग रोड के मौजूदा अलाइनमेंट को लेकर आपत्तियां आ रही हैं। आमला गांव में 25 सितंबर को सुनवाई होगी। शहरवासी यहां पेड़ कटाई से प्रोजेक्ट से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को लेकर आपत्तियां लगा रहे हैं। यहां प्रदूषण नियंत्रक मंडल से लेकर जिला प्रशासन के अफसर सुनवाई करेंगे। भोपाल सिटिजन्स फोरम व अन्य ने आपत्ति पत्र में प्रोजेक्ट को पर्यावरण स्वीकृति नहीं देने की मांग की है। फोरम के के सुरेंद्र तिवारी के अनुसार, विकास के नाम पर शहर की भोजताल रामसर साइट और पारिस्थितिकी तंत्र को स्थायी नुकसांन होगा।

आपत्तियों में प्रोजेक्ट से ये खतरे आ रहे सामने

-भोजताल 40 फीसदी पेयजल आपूर्ति करता है। प्रस्तावित मार्ग का 15.3 किमी का हिस्सा तालाब के अत्यधिक संवेदनशील कैचमेंट एरिया से गुजरता है। सड़कों से निकलने वाले जहरीले रसायन, माइक्रोप्लास्टिक और भारी धातुएं सीधे झील के जलग्रहण क्षेत्र में मिलकर जल गुणवत्ता को नष्ट कर देंगी।

-बड़े पैमाने पर मिट्टी के भराव और डामरीकरण से प्राकृतिक नालों का प्रवाह बाधित होगा। इससे ऊपरी इलाकों में जलभराव की स्थिति बनेगी और भूजल रीचार्ज जोन खत्म होने से गिरता जलस्तर और गहरा जाएगा।

-प्रस्तावित मार्ग वन विहार-कठौतिया वन्यजीव कॉरिडोर को विभाजित करता है, जो तेंदुए, भालू और लकड़बग्घों का प्राकृतिक मार्ग है। इसके अलावा, निर्माण कार्य के शोर, नाइट-लाइटिंग और प्रदूषण के कारण रामसर क्षेत्र में रहने वाली 200 से अधिक देशी और प्रवासी पक्षियों की प्रजातियों के बेघर होने का खतरा है।

-यह अलाइनमेंट भीमबेटका सांस्कृतिक परिदृश्य से जुड़े प्रागैतिहासिक शैलाश्रयों और पाषाण कालीन पुरातात्विक स्थलों के बेहद करीब से गुजरता है। निर्माण के दौरान भारी चट्टानों के विस्फोट और वाइब्रेशन से इन अमूल्य राष्ट्रीय धरोहरों को अपूरणीय क्षति होगी।

पर्यावरण मंजूरी से पहले ये करने की मांग

-जब तक कैचमेंट क्षेत्र से बाहर वैकल्पिक मार्ग का विश्लेषण सार्वजनिक न किया जाए, तब तक पर्यावरण मंजूरी रोकी जाए।

-एक स्वतंत्र और विशेषज्ञों द्वारा हाइड्रोलॉजिकल क्युमुलेटिव इंपैक्ट असेसमेंट कराएं, जिससे भोजताल में पानी के प्रवाह पर पड़ने वाले प्रभाव का सटीक आकलन हो सके।

-राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड और पुरातत्व विभाग की स्पष्ट जमीनी रिपोर्ट और मंजूरी के बिना प्रक्रिया आगे न बढ़ाएं।

Updated on:
17 Sept 2026 09:48 am
Published on:
17 Sept 2026 09:48 am