Narmada- केंद्र व राज्य विभाग से एनजीटी ने मांगी रिपोर्ट, पूछा- क्या नदी में दूध डालने से जल प्रदूषित होता है, क्या गाइडलाइन जरूरी?
Narmada- क्या दूध डालने से नदी का पानी प्रदूषित होता है! यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि नर्मदा में दूध अर्पित करने के खिलाफ एनजीटी में बाकायदा याचिका दायर की गई है। इसमें पूजा और अनुष्ठान के बाद नर्मदा में दूध चढ़ाने से नदी में प्रदूषण की बात कही गई है। एनजीटी ने अब इस संबंध में साइंटिफिक रिपोर्ट मांगी है। एनजीटी ने सीपीसीबी और एमपीपीसीबी को निर्देश दिए हैं कि वे जांच कर यह बताएं कि क्या धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान नदी में दूध डालने से जल प्रदूषण होता है। नर्मदा नदी में हजारों लीटर दूध चढ़ाने के मामले में सुनवाई करते हुए यह रिपोर्ट भी मांगी है कि क्या यह गतिविधि किसी गाइडलाइन से विनियमित है या इसके लिए गाइडलाइन की जरूरत है। एनजीटी सेंट्रल जोन बेंच ने सिद्धार्थ सिंह राजपूत की याचिका पर यह निर्देश दिए हैं।
सतदेव में पूजा और अनुष्ठान के बाद नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध चढ़ाया, इसके साथ 210 साडिय़ां भी नदी में बहाई
याचिका में बताया गया कि सीहोर जिले के भैरुंदा की ग्राम पंचायत सतदेव में पूजा और अनुष्ठान के बाद नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध चढ़ाया गया था। इसके साथ 210 साडिय़ां भी नदी में बहाई गईं। इससे पानी दूषित होने, नदी के जलीय जीवों के मरने और पानी में ऑक्सीजन कम होने की बात कही गई।
ट्रिब्यूनल ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दूध सबसे शुद्ध खाद्य पदार्थ है। यह एकमात्र ऐसी चीज है जिसे पानी में मिलाने पर अलग से खत्म नहीं किया जा सकता है।
विभाग ने कहा- ऐसी कोई गाइडलाइन नहीं
एनजीटी ने सुनवाई में पूजा के दौरान दूध बहाने से पानी दूषित होने संबंधी साइंटिफिक डेटा देने के निर्देश दिए। एनजीटी ने कहा कि नदी में दूध डालने पर प्रतिबंध लगाने संबंधी सीपीसीबी की कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं हैं।
हालांकि जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 24 किसी भी प्रदूषक पदार्थ को नदियों या कुओं में डालने पर रोक लगाती है। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या दूध को एक जैविक प्रदूषक माना जा सकता है जो जलीय जीवों की मृत्यु का कारण बनता है और ऑक्सीजन की कमी करता है।