राजधानी में सरकारी स्कूलों के सुविधाघर बदहाल, सफाई के लिए नहीं मिलता पर्याप्त बजट
भोपाल. शनिवार को करोंद के हाउसिंग बोर्ड स्कूल में विकास कार्यों की शुरुआत करने गए जनसम्पर्क मंत्री पीसी शर्मा के सामने स्कूल के सुविधाघरों की बदतर स्थिति खुलकर सामने आ गई। इसके बाद निगमायुक्त ने स्कूल पर स्पॉट फाइन लगवा दिया, लेकिन जिले के अधिकतर स्कूलों में सुविधाघरों की हालात दयनीय है। दरअसल स्कूलों को सफाई के लिए पर्याप्त बजट ही नहीं मिलता। पत्रिका ने मंगलवार को राजधानी के शासकीय स्कूलों में सुविधाघरों का जायजा लिया तो अधिकतर जगह स्थिति बेहद खराब मिली। दरअसल स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से न तो स्कूलों में भृत्य और सफाईकर्मी नियुक्त किए जाते हैं, न ही सुविधाघरों की सफाई के लिए पर्याप्त बजट ही दिया जाता है। शाहपुरा की शासकीय प्राथमिक शाला में सुविधाघरों की हालत बेहद खराब है। यहां पानी की सुविधा भी नहीं है। वहीं सुविधाघर के बाहर पानी लीकेज होकर बह रहा है। गंदगी और बदबू के कारण इन सुविधाघरों को उपयोग करना मुश्किल है। इस विद्यालय में 142 बच्चे पढ़ते हैं। शिक्षकों ने बताया कि सुविधाघरों की सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है, लेकिन निगमकर्मी झाड़ू लगाने भी नहीं आते। मीरा नगर में शासकीय नवीन प्राथमिक शाला के सुविधाघर भी बदहाल हंै।
150 रुपए महीने में कैसे साफ हों सुविधाघर?
बिट्टन मार्केट रविशंकर नगर माध्यमिक शाला में सुविधाघरों की हालत अपेक्षाकृत बेहतर मिली। यहां प्रधानाध्यापक दीपक जोशी ने बताया कि विभाग की ओर से सफाई पर दो हजार खर्च करने का प्रावधान है, लेकिन 150 रुपए महीने में सफाई संभव नहीं है, इसलिए अन्य खर्च के सात हजार तो मरम्मत के 10 हजार में से सफाई के लिए खर्च निकालकर हर दूसरे दिन सफाई कराते हैं।
नगर निगम से सफाई कराने के हैं निर्देश
शासन ने शहरी क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों में नगर निगम और ग्रामीण में पंच परमेश्वर योजना के तहत सफाई की व्यवस्था के निर्देश हैं। लेकिन अधिकतर स्थानों पर इसका पालन नहीं होता। शहर के स्कूलों में प्रधानाध्यापकों और प्राचार्यों से चर्चा में पता चला कि बार-बार कहने पर भी निगम कर्मी सुविधाघर साफ करना तो दूर परिसर में झाडू तक नहीं लगाते।
स्कूलों की सफाई के लिए नियमित बजट जाता है, इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में नगर निगम और ग्रामीण में पंच परमेश्वर योजना के तहत सफाई की व्यवस्था के निर्देश हैं। अधिकतर स्कूलों में सफाई हो
भी रही है, कमी वहीं हैं जहां इच्छाशक्ति की कमी है। अब मैने स्पॉट फाइन लगाने शुरू कर दिए हैं, जिस स्कूल में गंदगी मिलेगी वहां फाइन लगाया जाएगा। - नितिन सक्सेना, जिला शिक्षा अधिकारी