एक साल पहले 8 नवम्बर 2016 कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए प्रचलन में बंद हुए 500 और 1000 के बड़े नोटों को बंद करने का फैसला किया था।
भोपाल। एक साल पहले 8 नवम्बर 2016 कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए प्रचलन में बंद हुए 500 और 1000 के बड़े नोटों को बंद करने का फैसला किया था। नोटबंदी के बाद कुछ दिनों तक मध्यप्रदेश सहित देशभर में हड़कंप सा मच गया था, लेकिन मोदी सरकार की कालेधन पर अंकुश लगाने की मुहिम बेकार हो गई। चूंकि न भ्रष्टाचार रुका और न ही हवाला कारोबार। कारोबारियों ने नए नोटों के साथ अपना कारोबार फिर से शुरू कर दिया। गैरकानूनी तरीके से समानांतर बैंकिंग को यह हवाला नेटवर्क से करोड़ों रुपए का धंधा जारी है।
14 अप्रैल 2017 को भोपाल के एक फोटो स्टूडियो में छापे जा रहे नकली नोटों का खुलासा हुआ था। राजधानी क्राइम ब्रांच ने अशोका गार्डन थाना इलाके से अनुश्री फोटो स्टूडियो में छापा मारकर 2000-2000 के तीन लाख रुपए से ज्यादा के नकली नोटों के साथ चार लोगों को गिरफ्तार किया था।
20 दिन पहले पुलिस ने पकड़े हवाला के 80 लाख रुपए: राजधानी में हवाला कारोबार कितने धड़ल्ले से चल रहा है। दीपावली के चार दिन पहले एक ड्रायफ्रूट कारोबारी को उसके साथी के साथ हवाला के 80 लाख रुपए के साथ गिरफ्तार किया था।
कैशलेस की कवायद खूब हुई, मंजिल अब भी दूर
भोपाल. नोटबंदी के एक साल में मध्यप्रदेश में कैशलेस वर्किंग के लिए सरकार ने कई कदम उठाए, लेकिन अभी ये मंजिल से काफी दूर हैं। उस समय पूरे प्रदेश को १०० फीसदी कैशलेस करने का दावा पूरा नहीं हुआ। परेशान सरकारी कर्मचारी भी वेतन नकद मांगने लगे थे।
हालांकि, पिछले एक साल में प्रदेश में काफी काम डिजिटल किए गए हैं। स्कूल-कॉलेज की फीस से लेकर रजिस्ट्री-खसरा-खतौनी तक हर प्रकार के कामकाज में कैशलेस पेमेंट की सुविधा है। ज्यादातर सरकारी ट्रांजेक्शन ऑनलाइन हो रहे हैं। प्रदेश का पहला पूर्ण डिजिटल गांव राजधानी भोपाल का बडझेरी बना। यहां बैंक ऑफ बड़ौदा ने वाई-फाई से लेकर ई-पेमेंट की सारी सुविधाएं मुहैया कराईं। प्रदेश के हर गांव का नक्शा डिजिटल हो किया गया। भोपाल-इंदौर में ई-रजिस्ट्री सिस्टम लागू की गई है। सीएम समाधान, सीएम हेल्पलाइन, लोकसेवा गांरटी सहित अन्य सेवाओं में ऑनलाइन आवेदन होते हैं। इसके बावजूद लक्ष्य को पाने के लिए सिस्टम को अथक प्रयास करने की जरूरत है।