
भोपाल। लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी और प्रशासन की तरफ से गठित की गई टीम के चुनावी खर्चे के ब्योरे में भारी अंतर आ रहा है।
कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह की तरफ से प्रस्तुत ब्योरे में उनका खर्चा 21 लाख 30 हजार 136 बताया है। जबकि अलग-अलग विधानसभा में गठित प्रशासन की टीम ने उनका खर्चा 39 लाख 47 हजार 674 रुपए आंका है।
वहीं भाजपा प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर ने 6 लाख 27 हजार 663 रुपए खर्चे का ब्योरा प्रस्तुत किया है। प्रशासन की अलग-अलग टीमों ने इस खर्चे को 13 लाख 51 हजार 756 रुपए का रिकार्ड जुटाया है।
जिसको देखते हुए दोनों उम्मीदवारों को खर्च का सही हिसाब देने नोटिस जारी किया गया है। 48 घंटे में दोनों को जवाब देना होगा। तीसरे नंबर पर सपाक्स पार्टी की वीणा घाणेकर हैं, उनका चुनावी खर्चा 3 लाख 12 हजार 920 रुपए तक पहुंच गया है।
इनके बाद निर्दलीय प्रियंका खरे 2 लाख 41 हजार 914 रुपए खर्च किए हैं। सबसे कम खर्चा अम्बेडकर राइट पार्टी के गौतम नाग दवने और भारत प्रभात पार्टी के भाउराव की तरफ से किया गया है।
इन्होंने 12 हजार 500 रुपए खर्च करने का ब्योरा प्रस्तुत किया है। निर्दलीय में देवेंद्र प्रकाश मिश्रा ने ब्योरा नहीं दिया और प्रवीण सिंह ठाकुर और महेंद्र कटियार अनुपस्थित रहे।
इधर, साहूकारी पर कसेगा शिकंजा, ज्यादा वसूली की तो कार्रवाई:
प्रदेश में किसानों को कर्ज देने वाली साहूकारी प्रथा पर राज्य सरकार ने शिकंजा कसना तय कर लिया है। मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने शुक्रवार को गैर-लाइसेंसी साहूकारों और निर्धारित अधिकतम ब्याज दर से ज्यादा वसूलने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने मप्र साहूकार अधिनियम की समीक्षा करना भी तय किया। शुक्रवार को मोहंती की अध्यक्षता में गैर-बैंकिंग वित्तीय स्थापनाओं (एनबीएफसी) एवं अनिगमित निकायों के लिए गठित राज्य-स्तरीय समिति की बैठक में यह निर्णय लिए गए।
हाल ही में एक किसान ने साहूकारी कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद सरकार के स्तर पर साहूकारों पर शिकंजा कसने के कदम उठाने शुरू किए गए हैं।
समिति ने सीहोर एवं रतलाम जिले में जमा स्वीकार करने वाली कम्पनियों के विरुद्ध कार्रवाही नहीं किए जाने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर्स द्वारा त्वरित कार्रवाही करने का निर्णय लिया है। साथ ही 24 अन्य मामलों में भी जांच कराकर सीआईडी को देना तय किया।
विभिन्न मल्टी स्टेट सहकारी समितियों द्वारा अनाधिकृत रूप से प्राप्त की गई अथवा प्राप्त की जा रही राशि के विरुद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
नए आइएएस को मिलेगी ट्रेनिंग : यह भी तय किया गया कि नए आइएएस को प्रोबेशनर्स पीरियड व डिप्टी कलेक्टर्स को प्रशिक्षण मॉड्यूल में आर्थिक अपराधों संबंधित ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए आर्थिक अपराध संबंधित अधिनियमों को शामिल किया जाएगा।