
राधेश्याम दांगी भोपाल
आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को स्वास्थ्य में 2003 से 2009-10 के बीच हुए 500 करोड़ रुपए के घोटाले में कई नए अहम तथ्य हाथ लगे हैं। प्राथमिक जांच पंजीबद्ध करने के बाद जिन शैल कंपनियों को तत्कालीन अफसरों ने करोड़ों रुपए का ठेका दिया गया था, उन कंपनियों के कागज खंगाले तो पता चला है कि इन कंपनियों को जो मुनाफा हुआ है, वह रकम विदेशों में निवेश की गई है। यही नहीं कुछ समय बाद विदेशों से यह रकम फिर भारत लाई गई है। ईओडब्ल्यू को आशंका है कि स्विस बैंक में भी पैसा जमा करवाया गया है। सभी तत्कालीन बोगस कंपनियों की बैलेंस शीट, उनके खातों से हुए ट्रांजेक्शन और इनके खातों से किसके खातों में पैसा ट्रांसफर किया गया, जिन कंपनियों/व्यक्तियों को पैसे ट्रांसफर किए गए है, उनसे भोपाल आदि की कंपनियों का क्या वास्ता है? जैसे विषयों पर ईओडब्ल्यू ने जांच शुरु कर दी है। प्राथमिक जांच में इस बात के सबूत मिले हैं कि तत्कालीन अधिकारियों और भाजपा-कांग्रेस दलों के नेताओं के गठजोड़ ने मिलकर 500 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला किया है। इसमें आईएएस, आईपीएस और नेताओं के नाम भी शामिल है।
ईओडब्ल्यू के सूत्रों का कहना है कि ईओडब्ल्यू को इस मामले में हुए भ्रष्टाचार और घोटाले में कोई दिलचस्पी नहीं है और न ही वह इसकी जांच करेगा। ईओडब्ल्यू सिर्फ उन पांच छोटी व बोगस कंपनियों की जांच करेगा जिनके जरिए पैसे इधर, से उधर करते हुए विदेशों तक भेजा गया है। ईओडब्ल्यू को अब तक मलेशिया, सिंगापुर, हांग-कांग जैसे देशों में इन कंपनियों के जरिए पैसा ट्रांसफर करने के सबूत मिले हैं। गौरतलब है कि पूर्व में इस घोटाले की जांच में भ्रष्टाचार का खुलासा हो चुका है। टेंडर देने में भी भारी अनियमितताओं का खुलासा हो चुका है, लेकिन अब तक किसी भी एजेंसी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया है कि इन कंपनियों और अधिकारियों द्वारा कमाए गए पैसे गए कहां और इसका क्या और कहां उपयोग किया गया है। ईओडब्ल्यू इन्हीं बिंदुओं पर फोकस होकर जांच कर रही है।
मनी ट्रेल पर फोकस है जांच
ईओडब्ल्यू सिर्फ इन कंपनियों द्वारा किए गए मनी ट्रेल खुलासा कर संबंधितों के खिलाफ केस दर्ज कर सकती है। ईओडब्ल्यू को यह भी प्रमाण मिले हैं कि इन कंपनियों से न सिर्फ भारत के बाहरी देशों में पैसे भेजे गए हैं, बल्कि अन्य माध्यमों जैसे विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) आदि के रुप में यह पैसा फिर भारत में लाया गया है। अब ईओडब्ल्यू इन कंपनियों से जुड़े अफसरों के रिश्तेदारों और उनके द्वारा एफडीआई व घोटाले की अवधि में किए गए नए निवेश, धंधों और व्यापार आदि के बारे में जानकारी जुटा रही है, ताकि मनी ट्रेल को प्रमाणित किया जा सके।