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एमपी का ट्रैफिक मैनेज करेगी डी-कंजेशन पॉलिसी, गूगल मैप से लिया जा रहा पीक ऑवर का डेटा

MP Traffic : गूगल मैप से पीक ऑवर के डेटा का विश्लेषण कर तैयार किया जा रहे लेआउट- डिजाइन। ऐसे 6 शहरों में डी-कंजेशन पॉलिसी के तहत एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने हैं।
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MP Traffic

MP Traffic (एमपी का ट्रैफिक मैनेज करेगी डी-कंजेशन पॉलिसी Photo Source- Patrika)

De-Congestion Policy :मध्य प्रदेश के बड़े शहरों के भीतर ट्रैफिक के दवाब को कम करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने डी-कंजेशन पॉलिसी पर काम करना शुरू कर दिया है। शहर के सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव वाले लोकेशन पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। शुरुआत में 6 शहरों का चयन कर काम शुरू किया गया है। इसमें जबलपुर में एक कॉरिडोर तैयार किया भी जा चुका है। इसके अलावा शहर में ही एक और नया कॉरिडोर बनाने की तैयारी की जा रही है। वहीं, राजधानी भोपाल में भी 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है। ऐसे 6 शहरों में डी-कंजेशन पॉलिसी के तहत एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने हैं।

इन एलिवेटेड कॉरिडोर से बड़े शहरों का ट्रैफिक दबाव होगा कम

-भोपाल : शहर के बैरागढ़ इलाके में स्थित लाउखेड़ी से निगम विसर्जन घाट तक 3.7 किमी का 306 करोड़ से कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है, जिसका 80 फीसदी काम पूरा किया जा चुका है।
-इंदौर : शहर के एलआइजी से नवलखा चौराहे तक 7.44 किमी का 306 करोड़ से एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार करने का काम शुरू किया जा चुका है।
-उज्जैन : शहर के हरिफाटक फ्लाइओवर और चिमनगंज मंडी चौराहे से इंदौर गेट तक दाने वाले 5.32 कि.मी का 945 करोड़ की लागत से कॉरिडोर बनाने का काम शुरू किया जा चुका है।
-जबलपुर : शहर में 7 कि.मी का एक कॉरिडोर 1019 करोड़ से बनकर तैयार किया जा चुका है। जबकि, दूसरा बनाने की तैयारी विभाग द्वारा शुरू कर दी गई है।
-ग्वालियर: आईआईआईटीएम महारानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा, स्वर्ण रेखा नदी, गिरबाई एबी रोड पर 13.3 किमी का 1065 करोड़ से फोरलेन कॉरिडोर का निर्माण काम 75 प्रतिशत पूरा हो चुका है।
-रीवा : शहर में एलिवेटेड कॉरिडोर की डीपीआर बनाई जा रही है, जल्द काम शुरु किया जाएगा।

डिजाइन तैयार करने से पहले इन पर विश्लेषण

-प्रतिदिन गुजरने वाले वाहनों की संख्या
-पीक आवर में जाम की स्थिति
-सड़क की क्षमता दुर्घटनाओं का रिकॉर्ड
-भविष्य के यातायाता का अनुमान

गूगल से डेटा परीक्षण कर बनेगी डिजाइन

एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने से पहले वैज्ञानिक आधारों पर परीक्षण किया जाता है। खास बात यह है कि गूगल से पहले हर घंटे का डेटा एकत्रित किया जाता है। इसके बाद इस बात का विश्लेषण करते हैं कि, सबसे पीक ऑवर में यहां ट्रैफिक की क्या स्थिति रहती है। उसके आधार पर कॉरिडोर का लेआउट-डिजाइन तैयार करते हैं। इसका डिजाइन ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय से तैयार करवाया जा रहा है। साथ ही रोड सेफ्टी का भी ध्यान रखा जा रहा है।