अब खूंखार 'हत्यारे' भी बचाएंगे लोगों की जान, सरकार ने शुरू की यह योजना
भोपाल। जिंदगी लेने वाले हाथ अब लोगों की जिंदगी बचाने का काम करते हुए नजर आएंगे। मध्यप्रदेश में सरकार की इस योजना पर काम भी शुरू हो गया है। देश में यह अपने आप में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित सेंट्रल जेल से सरकार ने यह योजना शुरू की है। इसके तहत जेल में सजा काट रहे कैदियों के लिए पैरामेडिकल कोर्स शुरू भी कर दिए गए हैं। कैदियों की जिंदगी बदल देने वाला यह बड़ा कदम बताया जा रहा है।
जेल में कोर्स, आजादी के बाद नौकरी
इस कोर्स का उद्देश्य यह भी है कि जेल में बंद कैदियों को अपनी और अपने परिवार की दशा सुधारने के लिए प्रेरित किया जा सके। यह सजायाफ्ता कैदी जेल में पैरामेडिकल कोर्स करेंगे। तीन माह की अवधि वाले ये कोर्स जेल में लांच कर दिए गए हैं। इसके बाद जेल से सजा पूरी होने के बाद उनका नौकरी कर सकेंगे।
21 कैदियों ने लिया एडमिशन
पैरामेडिकल कोर्स के लिए अब तक 21 कैदियों ने एडमिशन ले लिया है। इसमें चार महिला कैदी भी शामिल हैं। बताया जाता है कि इनमें 90 फीसदी के करीब हत्या के आरोप में सजा काट रहे हैं। जेल विभाग की अधिकृत जानकारी के मुताबिक यूनिवर्सिटी से मान्यताप्राप्त पैरामेडिकल के दोनों कोर्स शुरू भी हो गए हैं। इसके अलावा अन्य कैदी भी ऐसे ही कोर्स करने में अपनी रुचि दिखा रहे हैं।
पैरामेडिकल कोर्स एक नजर में
-भोपाल जेल में शुरू हुए पैरामेडिकल कोर्स के लिए कैदियों का जेल में 5 साल रहना जरूरी है और 10वीं पास भी अनिवार्य रूप से पास होना चाहिए।
-पैरामेडिकल कोर्स में डिप्लोमा पूरा करने वाले उम्मीदवारों की सेवाएं जेल विभाग के अस्पताल में भी ली जा सकती हैं।
-इस कोर्स में क्वालिटी एजुकेशन के लिए 4 सीनियर टीचर्स को रखा गया है।
-सजा पूरी होने के बाद यह कोर्स कैदियों को समाज में स्थान दिला सकेगा।
-इसके अलावा कई अस्पतालों ने डिप्लोमा कर रहे कैदियों के लिए कैंपस सिलेक्शन में इंटरेस्ट दिखाया है।
-भोपाल सेंट्रल जेल में 20 हजार पुस्तकों की लाइब्रेरी है। इसे हालही में आधुनिक रूप दे दिया गया है। इस लाइब्रेरी में कोर्स से लेकर साहित्य, इतिहास, संस्कृति आदि से जुड़ी सैकड़ों किताबें हैं।
-इस लाइब्रेरी से कैदी सात दिनों के लिए किताब अपने साथ रख सकते हैं।
महिलाओं के लिए भी चलती है यह योजना
इससे पहले महिला कैदियों के लिए भी इस जेल में क्लासरूम बनाया गया था। जिसमें अंग्रेजी की क्लास लगती है। इसमें कई मर्डर के आरोप में सजा काट रही महिलाएं भी हैं, जो इस कक्षा में तल्लीनता के साथ पढ़ाई करती हैं।
यह भी है खास
-जेल में कैदियों को मानसिक तनाव कम करने के लिए तरह-तरह की एक्टिविटी भी कराई जाती है। कई त्योहारों पर आयोजन होते हैं, इसके अलावा उन्हें भलाई के कामों के लिए प्रेरित करने के कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
-योग कक्षाएं भी लगाई जाती हैं।
-जेल में कई कारीगर भी अपराध करके सजा काट रहे हैं। ऐसे में उनके हूनर का भी इस्तेमाल किया जाता है। कई कलाकारों से मूर्ति, पेंटिंग्स जैसी चीजें बनाई जाती है।