प्रदेश के कुछ जिलों में भौतिक सत्यापन के दौरान जिंदा लोगों को मृत बता कर उनकी पेंशन ही रोक दी गई।
भोपाल। सामाजिक न्याय विभाग द्वारा दी जाने वाली पेंशन के भौतिक सत्यापन में भारी गड़बड़ी सामने आई है। प्रदेश के कुछ जिलों में भौतिक सत्यापन के दौरान जिंदा लोगों को मृत बता कर उनकी पेंशन ही रोक दी गई।भौतिक सत्यापन का कार्य शहरों में नगरीय प्रशासन विभाग के वार्ड अधिकारियों ने और गांवों में पंचायत सचिवों ने किया है। भौतिक सत्यापन के दौरान पूरे प्रदेश में अभी तक 20886 लोग मृत पाए गए हैं।
जिंदा हैं और पेंशर के हकदार हैं
लेकिन इसमें से सौ से ज्यादा ऐसे मामले भी सामने आ गए हैं जिनमें मृत घोषित किए गए लोगों ने दावा कर दिया कि वे जिंदा हैं और पेंशर के हकदार हैं। इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ सरकार कड़ी कार्रवाई करने जा रही है। इस तरह के मामले के बाद पूरे प्रदेश में किए गए भौतिक सत्यापन में घोषित किए गए मृतकों की वास्तविक स्थिति एक बार फिर जांचने का काम भी शुरू हो गया है।
यूं खुला मामला-
जीवित लोगों को मृत बता देने से पेंशन पोर्टल पर उनका आईडी ही लॉक हो गया। ऐसे में पेंशन लेने पहुंचे लोगों को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने इसकी शिकायत कलेक्टर से की। मामला प्रकाश में आने के बाद कई जिलों ने मंाग की है कि ऐसे प्रकरणों में आईडी को अनलॉक कर इन हितग्राहियों को जीवित दर्शाया जाए।
सामाजिक न्याय विभाग के आयुक्त कृष्ण गोपाल तिवारी ने इस मामले में कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए सभी कलेक्टरों से साफ कहा है कि पहले दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ की गई जांच का प्रतिवेदन और की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी भेजी जाए उसके बाद ही पोर्टल अनलॉक किया जाएगा।
बुरहानपुर में आए सबसे ज्यादा मामले-
जीवित लोगों को मृत बता कर उनकी पेंशन बंद कर देने के सबसे ज्यादा मामले बुरहानपुर जिले में सामने आए हैं। यहां इस तरह के 15 प्रकरण हैं, जिनमें हितग्राही बाद में जीवित निकला है। यहां लगभग 50 हजार हितग्राहियों का सत्यापन किया गया जिसमें से 126 को मृत बताया गया, लेकिन उसमें से 15 बाद में जीवित निकले। ऐसे में बुरहानपुर जिले में किए गए सत्यापन के कार्य को फिर से जांचने का काम किया जा रहा है।
सामाजिक न्याय एवं नि:शक्त जन कल्याण विभाग की विभिन्न पेंशनों के भौतिक सत्यापन का कार्य चल रहा है। यह अब अंतिम चरण में हैं। कुछ जिलों में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां जीवित लोगों को मृत बताकर कर उनकी पेंशन रोक दी गई है। इसमें जो भी अधिकारी-कर्मचारी दोषी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
कृष्ण गोपाल तिवारी, आयुक्त सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण