
भोपाल. हर व्यक्ति अपने साथ स्टेनलेस स्टील की स्ट्रॉ लेकर चले तो एक साल में प्लास्टिक स्ट्रॉ का उपयोग रुकेगा। ऐसी ही रोजमर्रा की आदतों में सुधार कर कई सौ टन वन टाइम यूज्ड प्लास्टिक की बर्बादी रोकी जा सकती है।
यह बात शनिवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा होटल पलाश में वन टाइम यूज्ड प्लास्टिक के खतरों पर आयोजित कार्यशाला कही गई। इस अवसर पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के डॉ. योगेंद्र कुमार सक्सेना सहित वैज्ञानिकों ने बात रखी। वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक कचरे के खतरे, पर्यावरण को नुकसान एवं स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव को बताया। क्षेत्रीय अधिकारी पीएस बुंदेला ने बताया कि अमानक प्लास्टिक प्रतिबंधित है, इसके बाद भी होटल-रेस्टोरेंट व शादी-समारोहों में उपयोग हो रहा है। चाट ठेलों, रेस्टोरेंट, होटल में बर्तनों के उपयोग से रोजाना कई सौ किलो प्लास्टिक कचरे को फैलने से रोका जा सकता है।
खतरों से हैं अनजान
प्लास्टिक की कटोरी, चम्मच, गिलास, स्ट्रॉ वन टाइम यूज्ड प्लास्टिक हैं। प्लास्टिक की थाली में खाने की पैकिंग, पॉलीथिन में चाय, कचौड़ी, समोसे पैक करने से प्लास्टिक खाद्य पदार्थ में मिल जाता है। ये तत्व कैंसर कारक हैं। वैज्ञानिक एसएस पंड्या ने बताया कि पानी का विकल्प होते हुए भी बोतलबंद पानी मंगाया जाता है। यह मिनरल वाटर नहीं, बल्कि नुकसानदायक होता है। होटल और रेस्टोरेंट्स में भी बर्तनों के बजाए बोतलबंद पानी परोसा जा रहा है।
एक-एक संकल्प कर सकता है बड़ा बदलाव
क्षेत्रीय अधिकारी पीएस बुंदेला ने कहा कि नागरिक अपनी आदतों और सबसे ज्यादा जरूरत को ध्यान रखकर अपने साथ में यदि एक स्थाई स्ट्रा, स्टील की चम्मच या छोटा गिलास जैसी कोई चीज भी साथ लेकर चलने लगें तो साल भर में कई किलो वन टाइम यूज्ड प्लास्टिक के कचरे को फैलने से रोक सकते हैं। बुंदेला ने दोहराया कि आम नागरिकों के साथ व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को जल्द से जल्द इस बारे में सचेत हो जाना चाहिए नहीं तो बोर्ड कार्रवाई का रास्ता अपनाएगा।