बुंदेलखंड-विंध्य में ऐसे मजबूत की जमावट भाजपा को मोदी का भरोसा कांग्रेस को राहुल का दमलोकसभा के रण का दूसरा चरण : बुंदेलखंड और विंध्य में छह को पड़ेंगे वोट
भोपाल. MP में छह लोकसभा सीटों पर वोटिंग के बाद कांग्रेस-भाजपा ने दूसरे चरण में मतदान वाली सात सीटों पर जमावट मजबूत कर ली है। इन सीटों पर छह मई को वोट डाले जाएंगे। इन सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा है। इनमें बुंदेलखंड की टीकमगढ़, खजुराहो, दमोह व विंध्य की सतना, रीवा और मध्य क्षेत्र की होशंगाबाद व बैतूल सीट शामिल है।
कांग्रेस को बुंदेलखंड से बहुत उम्मीदें हैं। यह उम्मीद उसे विधानसभा चुनाव में बदले वोटिंग समीकरणों से जागी है। उसने यहां पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के सहारे जीत की बाजी लगाई है। इन सात सीटों में से पांच पर खुद राहुल गांधी ने वक्त दिया है। भाजपा ने विंध्य में अपनी रणनीति के तहत गोटियां फिट की हैं। भाजपा मोदी फैक्टर के सहारे ही विंध्य को साध रही है। उसे लगता है कि जातिगत समीकरणों पर मोदी लहर भारी पड़ेगी।
कांग्रेस को बुंदेलखंड पर भरोसा
कांग्रेस को इस बार सबसे ज्यादा भरोसा बुंदेलखंड पर है। यहां की टीकमगढ़, खजुराहो और दमोह लोकसभा सीट पर सात मई को वोट डाले जाएंगे। राहुल गांधी ने इन तीनों सीटों पर चुनाव प्रचार किया है। कांग्रेस को लगता है कि बुंदेलखंड हाथ के साथ है, आखिरी दम की जरूरत थी जो राहुल की सभा से पूरी हो गई।
टीकमगढ़ में भाजपा प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक से कांग्रेस की किरण अहिरवार का मुकाबला है। खजुराहो से कांग्रेस ने विधायक विक्रम सिंह नातीराजा की पत्नी कविता सिंह को प्रत्याशी बनाया है, उनके सामने प्रदेश भाजपा के महामंत्री वीडी शर्मा हैं। दमोह में भाजपा के दिग्गज नेता प्रहलाद पटेल के सामने कांग्रेस ने प्रताप सिंह लोधी को प्रत्याशी बनाया है।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां से बढ़त हासिल की है। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री राजीव सिंह कहते हैं कि इस बार भाजपा के ये गढ़ ढहने वाले हैं। कांग्रेस ने यहां पूरी रणनीति के साथ काम किया है। राहुल गांधी ने बुंदेलखंड के अलावा सतना और होशंगाबाद पर भी फोकस किया है।
भाजपा ने चला विंध्य जीत का पांसा
भाजपा विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने की योजना पर काम कर रही है। पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ला को रीवा और सतना की खास जिम्मेदारी सौंपी है। इन दोनों सीटों पर भाजपा के मौजूदा सांसद प्रत्याशी हैं। भाजपा एंटी इंकम्बेंसी के असर को भी कम करने की रणनीति पर काम कर रही है।
भाजपा को विंध्य में सबसे ज्यादा भरोसा मोदी लहर का है। रीवा में भाजपा के जनार्दन मिश्रा के सामने कांग्रेस के कांग्रेस के सिद्धार्थ तिवारी हैं, दोनों ब्राह्मण वर्ग से हैं इसलिए यहां जाति का फॉर्मूला असरदार नहीं रहा। सतना में गणेश सिंह के सामने कांग्रेस के राजाराम त्रिपाठी हैं। भाजपा को एंटी इंकम्बेंसी के कारण जातिगत समीकरण यहां भी बहुत काम का नजर नहीं आ रहा। राजेंद्र शुक्ला कहते हैं कि विंध्य में मोदी लहर साफ तौर पर महसूस की जा सकती है। युवाओं में मोदी को लेकर क्रेज है, इसलिए इन सीटों पर भाजपा की जीत में कोई संदेह नहीं है।
विधानसभा चुनाव में ऐसे बदले समीकरण
टीकमगढ़ में वीरेंद्र कुमार खटीक कांग्रेस प्रत्याशी से 2.08 लाख वोटों से जीते थे, लेकिन अब वो बढ़त घटकर सिर्फ 64 हजार ही बची है। दमोह में प्रहलाद पटेल ने कांग्रेस को 2.13 लाख वोटों के अंतर से हराया था, लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद जीत का अंतर घटकर महज 16 हजार रह गया है। भाजपा की परंपरागत सीट खजुराहो में नागेंद्र सिंह 2.46 लाख से जीते थे, अब जीत का अंतर एक लाख से कम हो गया है। भाजपा यहां पर 89 हजार की बढ़त पर आ गई है।