- संसदीय कार्य विभाग ने विधानसभा को दूसरी बार लिखा पत्र- कहा कांग्रेस ने वचन पत्र में वादा किया है, इसे पूरा करना है - विधानसभा ने दूसरे राज्यों से मांगी जानकारी
डॉ. दीपेश अवस्थी की रिपोर्ट
भोपाल। छत्तीसगढ़ की तर्ज पर मध्यप्रदेश विधानसभा की कार्यवाही में बाधा डालने वाले विधायकों के भत्ता रोकने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में संसदीय कार्य विभाग ने विधानसभा सचिवालय को पत्र लिखा है। विभाग ने पत्र में यह भी लिखा है कि कांग्रेस ने वचन पत्र में इसका वादा किया था, इसे पूरा करना है। ऐसे में इस पर जल्द निर्णय लिया जाए। इसके पहले संसदीय कार्य विभाग एक पत्र और लिख चुका है। सरकार का दूसरी बार पत्र आने के बाद विधानसभा सचिवालय इस मामले में सक्रिय हो गया है। इसके लिए आनन-फानन में दूसरे राज्यों से जानकारी बुलवाई जा रही है कि वहां पर कार्यवाही में बाधा बनने वाले विधायकों पर क्या एक्शन लिया जाता है।
दरअसल, पिछले वर्षों में सदन की बैठकों में हंगामा और शोर शराबा करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। इसके कारण प्रदेश के कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा नहीं हो पाती। इतना ही नहीं सत्तारुढ़ दल कई बार महत्वपूर्ण विषय और विधेयक बिना चर्चा के पारित करवा लेते हैं। ऐसे में उन विधेयकों की अच्छाई-बुराई को लेकर भी सदन में चर्चा नहीं हो पाती।
हंगामा और शोर शराबा के कारण कई बार सदन की बैठकें निर्धारित समय के पहले समाप्त की गई। इससे सदन की बैठकों का उद्देश्य पूरा नहीं होने के आरोप भी लगे। विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने आमजन से वादा किया था कि सदन की बैठकें निर्धारित समय तक चलाने का प्रयास होगा। सदन की बैठकों के दौरान हंगामा हुआ तो विधायकों को उस दिन का भत्ता नहीं मिलेगा। इस दिशा में प्रयास शुरू हुए हैं, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका।
समिति की सिफारिश पर स्पीकर लेंगे निर्णय -
संसदीय कार्य विभाग के पत्र के बाद से विधानसभा सचिवालय सक्रिय तो हुआ है लेकिन अभी यह कार्यवाही सिर्फ कागजों तक सीमित है। विधानसभा सचिवालय ने अन्य राज्यों से जानकारी बुलाई है। असल में सचिवालय यह पता करना चाहता है किस राज्य में क्या प्रावधान है। यह सभी जानकारी विधानसभा की नियम समिति के समक्ष पेश की जाएगी। नियम समिति की सिफारिश के आधार पर स्पीकर निर्णय लेंंगे।
1500 रुपए मिलता है भत्ता -
विधायकों के वेतन-भत्ते की बात करें तो यह एक लाख रुपए से अधिक है। सत्र के दौरान उन्हें 1500 रुपए प्रतिदिन भत्ता अलग से मिलता है। यानी जितने दिन सदन की बैठकें होंगी उन्हेंं यह भत्ता प्रतिदिन के हिसाब से मिलेगा। कांग्रेस के वचन पत्र का पालन हुआ तो हंगामा के कारण सदन की कार्यवाही नहीं चली तो विधायकों को यह भत्ता नहीं मिलेगा।
हर घंटे 40 लाख का खर्च -
एक अनुमान के मुताबिक विधानसभा की कार्रवाई में 40 लाख रुपए खर्च होता है। लेकिन जब सदन में महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के बजाय हंगामा और शोर शराबा होता है तो यह पैसा व्यर्थ जाता है। विधायकों के लिए यह राशि जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स की होती है, इसलिए लोग चाहते हैं कि आमजन के महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदन में चर्चा हो।
यह होते रहे प्रयास -
सदन की बैठकें सुचारू ढंग से कराए जाने के लिए समय-समय पर प्रयास होते रहे हैं। भाजपा कार्यकाल में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीताशरन शर्मा ने सदन की बैठकों के पहले सर्वदलीय बैठक की परम्परा शुरू की थी। इसका मकसद भी यही होता था कि सदन में उठाए जाने वाले विषयों पर यहीं चर्चा हो जाए। यदि जरूरी हुआ तो मुद्दों को सदन में उठाया जाए, लेकिन इसका असर कम ही दिखा। सदन में अधिक हंगामा होने के कारण कई बार स्पीकर नेता प्रतिपक्ष और संसदीय कार्य मंत्री से अलग से चर्चा करते हैं। कार्रवाई के दौरान भी निर्देश दिए जाते हैं। कार्य मंत्रणा समिति की बैठकों में भी इसी प्रकार के प्रयास होते हैं।
विधानसभा में हंगामा -
- वर्ष 2017 के बजट सत्र में हंगामा ऐसा हुआ कि बजट और महत्वपूर्ण विधेयक बिना चर्चा के पारित हो गए।
- जुलाई 2015 के मानसून सत्र में व्यापमं को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी सदस्यों ने मुख्यमंत्री के इस्तीफा की मांग की। नौ दिन चलने वाला मानसून सत्र तीन दिन में समाप्त हो गया।
- प्रश्नकाल चढ़ता रहा है हंगामे की भेंट।
- वर्ष 2017-18 में व्यापमं और सिंहस्थ घोटाला के चलते सदन की कार्यवाही लगातार बाधित रही। ओला पाला पर किसानों की फसल बर्वाद होने, मुआवजा न मिलने विपक्षी सदस्यों ने सरकार को घेरते हुए हंगामा किया। सदन की कार्रवाई लगातार बाधित हुई।
- कानून व्यवस्था पर हंगामा, भोपाल में रेलवे टे्रक पर कोचिंग की छात्रा से दुष्कर्म।
- जून 2018 में आपातकाल की बरसी पर इंदिरा गांधी का जिक्र आने पर सदन में जमकर हंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करना पड़ी। मानसून सत्र के शुरू होने के दूसरे दिन ही हंगामा हुआ। पांच बैठकें प्रस्तावित थीं।
किसने क्या कहा -
संसदीय कार्य विभाग का पत्र मिला है। अन्य राज्यों से जानकारी बुलाई गई है। नियम समिति इस पर विचार करेगी। स्पीकर इस मामले में अंतिम निर्णय लेंगे।
- एपी सिंह, प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश विधानसभा
यह सही है कि यदि विधायकों को हंगामा के चलते भत्ता नहीं मिलेगा तो वे शायद वे सदन की बैठकों के दौरान गंभीरता दिखाएं। बेहतर यही होगा कि सदन इस मामले में सर्व सम्मति से निर्णय ले।
- सुभाष कश्यप, संविधान विशेषज्ञ