रेलवे का निजीकरण का काम धीरे-धीरे गति पकड़ रहा है. टिकट बेचने से लेकर रेलवे स्टेशनों का संचालन तक निजी हाथों में सौंपा जा रहा है.
भोपाल. रेलवे का निजीकरण का काम धीरे-धीरे गति पकड़ रहा है. टिकट बेचने से लेकर रेलवे स्टेशनों का संचालन तक निजी हाथों में सौंपा जा रहा है. इससे रेल यात्रा लगातार महंगी होती जा रही है. रेलवे ने इस दिशा में एक और नया कदम उठाया है जिसमें रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर प्राइवेट टिकट काउंटर खोले जाने की तैयारी की जा रही है. इसका भार यात्रियों पर भी पड़ेगा क्योकि यहां किराया बढ़ाने की बात भी सामने आ रही है. रेलकर्मियों ने भी दबे-छुपे शब्दों में रेलवे के इस कदम का विरोध जताना प्रारंभ कर दिया है.
रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर अभी पांच आरक्षित रेल टिकट काउंटर चल रहे हैं. जानकारी के अनुसार इन पांच आरक्षित रेल टिकट काउंटरों में से एक काउंटर निजी हाथों में जा सकता है। अभी इन सभी काउंटरों का संचालन रेलवे ही करता है। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित प्राइवेट काउंटरों पर रेल यात्रियों को टिकट लेने के बदले मूल किराए से कुछ रुपए अधिक चुकाने पड़ सकते हैं।
टिकट काउंटरों पर सेवाएं दे रहे रेलकर्मियों का दावा है कि रेलवे के इस निर्णय के दूरगामी नुकसान होंगे- रेलवे के इस निर्णय का विरोध भी हो रहा है. टिकट काउंटरों पर सेवाएं दे रहे रेलकर्मियों का दावा है कि रेलवे के इस निर्णय के दूरगामी नुकसान होंगे। रेलवे इन टिकट काउंटरों के लिए नए युवाओं को रोजगार भी नहीं देगा। गौरतलब है कि रानी कमलापति रेलवे स्टेशन मध्यप्रदेश का वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन है. यहां कई सुविधाएं एयरपोर्ट की तर्ज पर दी जा रहीं हैं.