हिन्दी भवन में पावस व्याख्यान माला का आयोजन
भोपाल। अप्रकृति ने स्त्री को क्षमा, धैर्य, ममता और वाणी का माधुर्य जैसे गुण दिये हैं। स्त्री अपने भीतर छिपी उस शक्ति को पहचाने तभी नारी सशक्तिकरण की सार्थकता है। प्रकृति से मिली शक्तियों पर नारी को गर्व और गौर करना चाहिए। यह कहना है गांधीवादी विचारधारा समाजसेवी राधा भट्ट का।
वे रविवार को हिन्दी भवन में मप्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के आयोजन 17वीं वसंत व्याख्यानमाला में 'नारी सशक्तिकरण: गांधी जी की दृष्टि में' विषय पर बतौर मुख्य वक्ता बोल रहीं थीं। बा-बापू 150 समारोह पर केन्द्रित यह समारोह गांधी भवन न्यास, मानस भवन और माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर गांधी के आदर्शों और विचारों की प्रख्यात विद्वान डॉ. शुभदा पाण्डे मौजूद थीं जबकि अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष सुखदेव प्रसाद दुबे ने की।
हर महिला को होना चाहिए निर्भीक
डॉ. पाण्डे ने कहा कि एक लड़की को निडर और निर्भीक होना चाहिए। एक शिक्षित और स्वावलंबी नारी सही मायने में समाज में सशक्त नारी है। उन्होंने कहा कि मैं एक ऐसे परिवार से आती हूँ जहाँ गांधी का दर्शन और विचार बहुत गहरे तक समाया था।
मैंने गांधी को जितना भी समझा वह में पितामह की नजर से ही समझा है। सुखदेव दुबे ने कहा कि आज यहां जो विचार व्यक्त हुए हैं वे नारी सशक्तिकरण के साथ ही पुरुष सशक्तिकरण के रास्ते भी खोलते हैं। आज पुरुषों में यह दम्भ आ गया है कि वह नारी को स्वतंत्र और सशक्त बनाएगा जबकि ऐसा नहीं है। नारी को समानता का दर्जा देना होगा।
इनका हुआ सम्मान
समारोह में वीरेन्द्र तिवारी रचनात्मक अवदान सम्मान से रचनात्मक समाजसेवा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने के लिए राधा भट्ट को सम्मानित किया गया। आलोचक डॉ. प्रभाकर श्रोत्रिय की स्मृति में दिए जाने वाला सम्मान वरिष्ठ आलोचक डॉ. रीतारानी पालीवाल को दिया गया। डॉ. सुरेशचन्द्र शुक्ल 'चन्द्र' नाट्य पुरुस्कार वरिष्ठ रंगकर्मी कमल जैन को दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान कमल किशोर दुबे के व्यंग्य संग्रह 'गधा यहीं का' का भी विमोचन हुआ। किताब में 25 व्यंग्य हैं, जिसके कारण इसे व्यंग्य पच्चीसी भी कहा गया है। विमोचन कार्यक्रम में रक्षा सिसोदिया, आरके पालीवाल, सुखदेव प्रसाद दुबे, डॉ. शुभदा पाण्डे, राधा भट्ट, प्रो. रीता रानी पालीवाल उपस्थित रहीं।