चार दिन बाद पुरुषोत्तम मास शुरू हो रहा है। इस मास के शुरू होते ही भले ही मांगलिक कार्यों पर प्रतिबंध लगेगा, लेकिन धार्मिक कार्यों का मान बढ़ेगा
13 दिसंबर को विवाह का आखिरी मुहूर्त
पंडितों के अनुसार 23 जुलाई से 19 नवंबर तक देवशयनकाल रहेगा। देवउठनी एकादशी के साथ विवाह के मुहूर्त शुरू हो जाते हैं, लेकिन 17 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक शुक्र का तारा अस्त रहेगा। वहीं, गुरु का तारा 12 नवंबर से अस्त हो जाएगा, जो 7 दिसंबर को उदित होगा। 12 तथा 13 दिसंबर को विवाह के मुहूर्त है। 13 दिसंबर को इस साल विवाह का आखिरी मुहूर्त है। 16 दिसंबर से मलमास लग जाएगा, जो 14 जनवरी तक रहेगा। ऐसे में विवाह के मुहूर्त अगले साल मकर संक्रांति के बाद ही हैं।
इसलिए नहीं कर सकते मांगलिक कार्य
अधिकमास को वैज्ञानिक सिद्धांतों से विवाह, उपनयन, यज्ञ-महोत्सव, देव प्रतिष्ठा, गृह प्रवेश आदि संस्कार उद्यापन आदि में मान्यता नहीं दी गई। कारण कि इस अवधि में सूर्य की किसी राशि के तारा समूहों द्वारा लाभदायक ऊर्जा नहीं मिलती। हालांकि इस दौरान अंग्रेजी तारीख से आने वाले पर्व, उत्सव व जयंतियां मनाई जा सकती हैं।
कैसे होता है अधिकमास Adhikmas
भगवान सूर्य का एक वर्ष के 12 महीनों में प्रतिमाह 12 राशियों में संचरण (संक्रमण) होता है तब संवत्सर बनता है। अमावस्या से अमावस्या तक जिस माह में सूर्य का किसी भी राशि में संक्रमण (मास संक्रांति) नहीं होता वह अधिकमास कहलाता है। कभी-कभी अमांत मास (एक अमावस्या से दूसरी अमावस्या) में दो बार संक्रांति आ जाती है, उसे क्षय मास कहते हैं। अधिकमास और क्षय मास दोनों ही मलमास माने जाते हैं। जिस कारण शुभ कार्य नहीं कर सकते।