
FCI Rejects 17000 Metric Tons of Wheat from MP
FCI- एमपी में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का काम तेजी से चल रहा है। गेहूं खरीदी में मुख्यमंत्री का गृह जिला उज्जैन सबसे आगे निकल गया है। यहां शनिवार शाम तक रेकॉर्ड तोड़ 4.79 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। इधर, उत्पादन में कई बार राष्ट्रीय रेकॉर्ड बना चुके नर्मदापुरम में इस बार अभी तक 2.58 लाख मीट्रिक टन ही खरीदी हुई। इसमें भी 3500 मीट्रिक टन गेहूं को एफसीआइ ने रिजेक्ट कर दिया। यह आंकड़ा प्रदेश के 55 जिलों में सबसे अधिक है। अब रिजेक्ट गेहूं की ग्रेडिंग कराई जा रही है, जिसे दोबारा भेजा जाएगा। प्रदेश में कुल 17 हजार मीट्रिक टन गेहूं रिजेक्ट किया गया है जिसका किसानों को भुगतान अटक गया है।
उधर खरीदे गए गेहूं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में भोपाल प्रदेश में नंबर- 1 पर है। यहां 1.94 लाख मीट्रिक टन की खरीदी हुई, जिसमें 90 प्रतिशत को एफसीआइ ने स्वीकार किया और 92 फीसद का परिवहन हो चुका है।
प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर कई उतार-चढ़ाव आए। किसानों को परेशान भी होना पड़ा। इसके बावजूद उज्जैन, भोपाल जैसे कई जिलों में स्थानीय प्रशासनक की सूझबूझ से खरीदी में अब तक का रेकॉर्ड अच्छा दिखाई दे रहा है। कुछ जिलों में प्रशासनिक चूक ने सरकार की प्रदेश स्तर पर किरकिरी कराई। जबकि मुख्यमंत्री ने केंद्रों तक पहुंचना शुरू किया तो सुधार भी नजर आया। अब ज्यादातर कलेक्टर केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, किसानों के हालचाल जान रहे हैं। प्रदेश को 100 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य मिला है, 15 दिन खरीदी के बचे है।
खरीदे गए गेहूं को सुरक्षित गोदामों तक पहुंचाने में रीवा संभाग प्रदेश में सबसे ज्यादा पिछड़ा है। सिंगरौली ने 50 फीसद, मऊगंज ने 31, सीधी ने 40, मैहर ने 46, सतना ने 49 और रीवा ने खरीदे गए गेहूं में से 56 फीसद का ही परिवहन किया है। हालांकि जबलपुर संभाग के मंडला में भी 46 प्रतिशत ही परिवहन हो पाया है।
ऐसे बढ़ी स्पीड
सैटेलाइट मैपिंग में गेहूं के खेत खाली बताए गए। इसकी वजह से स्लॉट बुकिंग में दिक्कत आई तो मुख्यमंत्री ने शिथिलता बरतने के निर्देश दिए। तब बात बनी।
स्लॉट बुकिंग वाला सर्वर ठप्प पड़ा तो मुख्यमंत्री ने अफसरों को फटकारा और ठीक कराया, गेहूं खरीदी भी 5 से बढ़ाकर 6 दिन की। देर रात तक तुलाई शुरू कराई है। तौलकांटों की संख्या पहले से बढ़ाई है।
इन जिलों का गेहूं का एक दाना रिजेक्ट नहीं:
राजगढ़, उज्जैन, मंदसौर, आगर मालवा, रतलाम, नीमच, हरदा, जबलपुर, पांढुर्णा, गुना, शहडोल।
प्रदेश के 55 जिलों में 54 लाख मीट्रिक टन से अधिक की गेहूं खरीदी हो चुकी है। इसमें से 85 प्रतिशत का परिवहन हुआ है, जबकि 17 हजार मीट्रिक टन रिजेक्ट भी हुआ है। यह गेहूं खराब नहीं होता, बल्कि तय मानकों को पूरा नहीं करता, इसलिए एफसीआइ इसे स्वीकार नहीं करता। जब तक गेहूं की यह मात्रा स्वीकार नहीं कर ली जाती, तब तक किसानों को भुगतान नहीं मिलता।
Updated on:
09 May 2026 11:30 am
Published on:
09 May 2026 11:10 am
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