- वन विभाग ने जारी किया अलर्ट, घुमक्कड़ों की डॉग स्क्वॉड से होगी सर्चिंग - राजधानी सहित आसपास 25 बाघों का मूवमेंट, जंगल के आसपास बढ़ रहीं गतिविधियां - सालभर में छह टाइगर की हो चुकी है मौत
भोपाल. राजधानी के urban tigers खतरे हैं। टाइगर का शिकार करने के लिए कुख्यात बावरिया और पारदी गिरोह राजधानी के आसपास के जंगलों में मौजूद हैं, जो घुमक्कड़ों के रूप में घूम रहा है। बीते साल जिन छह टाइगर की मौत हुई उनमें कुछ का शिकार हुआ। गिरोह से इसके तार जोड़े जा रहे हैं। वन विभाग ने अलर्ट जारी किया है। राजधानी के आसपास 25 टाइगर हैं। चंदनपुरा, कलियासोत, समरधा रेंज सहित आसपास के जिलों में इनका मूवमेंट हैं। औबेदुल्लागंज और रायसेन में बीते साल टाइगर की मौत के मामले सामने आए। यह मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। टाइगर स्ट्राइक फोर्स जांच कर रही है मौत सामान्य है या शिकार हुआ। जंगल के आसपास घुमक्कड़ों की वन विभाग निगरानी करेगा। डॉग स्क्वॉड जंगल के जरिए जंगल के आसपास के डेरों की सर्चिंग होगी। वन क्षेत्र के आसपास सभी व्यक्तियों के आधार कार्ड की जांच की जानी है।
वन विभाग के मुताबिक कुख्यात बाघ शिकारी कल्ला बावरिया निवासी और पुजारी बावरिया होशियारपुर (पंजाब) बीेते सालों में गिरफ्तार किए गए थे। कुख्यात बाघ शिकारी अजीत पारधी को महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ्तार किया है। लेकिन इनके गिरोह सक्रिय हैं। महाराष्ट्र, असम, तमिलनाडु, मेघालय में इनकी सक्रियता ज्यादा रही।
एक्सपर्ट के मुताबिक तंत्रमंत्र के लिए बाघ के शिकार के मामले सामने आते हैं। इसके दांत, मूंछ के बालों के लिए इसे मारा जाता है।
इतने बाघों की मौत और हमले
जंगलों के आसपास के डेरों की जांच होना है। यहां रहने वालों की जानकारी जुटाई जाएगी। सूचना मिली है कि इनके बीच बाघ के शिकारी हो सकते हैं। जांच शुरू कर रहे हैं। दलों को तैनात किया जा रहा है।
लोकप्रिय भारती,जिला वन अधिकारी