भोपाल

MP News- सीएस बनते ही वन भूमि से हटी पूर्व IAS राणा के पति की जमीन, पावरफुल को राहत, आमजन परेशान

Forest Department - वन बनाम निजी जमीन: फैसले असमान, विवाद में फंसी 50 हजार हेक्टेयर जमीन मप्र में जमीन विवाद 60 साल पुराना

2 min read
Apr 12, 2026
Relief from Forest Department for Husband of Former CS (IAS) Veera Rana (Photo Source- Patrika)

Forest Department - मध्यप्रदेश में जमीनी विवाद कोई नई समस्या नहीं, बल्कि छह दशक से चली आ रही एक जटिल चुनौती बन चुकी है। हालात यह हैं कि प्रभावशाली लोग जहां ऐसे विवादों से जल्दी छुटकारा पा लेते हैं, वहीं आम नागरिक वर्षों तक सरकारी ऑफिसों और अदालतों के चक्कर काटते रहते हैं। मध्यप्रदेश में पूर्व IAS वीरा राणा के सीएस बनते ही उनके आइपीएस पति संजय की वन विभाग ने दखल से बाहर कर दी थीं। इधर प्रदेश में निजी भूमि से जुड़े 10 हजार से अधिक प्रकरण लंबित हैं। इसके अलावा राजस्व और वन विभाग के बीच सीमा विवाद के हजारों मामले वर्षों से अटके हुए हैं। सबसे गंभीर स्थिति उन करीब 50 हजार हेक्टेयर जमीन की है, जिस पर आम लोग अपनी निजी मिल्कियत का दावा करते हैं, जबकि वन विभाग उसे वन भूमि मानता है।

गुना, शिवपुरी, छिंदवाड़ा, सागर, शहडोल, पन्ना और सिवनी जैसे जिलों में यह समस्या व्यापक रूप से देखने को मिल रही है। राजस्व और वन विभाग के बीच सीमा विवाद के भी हजारों मामले चल रहे हैं। जिस पर मुख्य सचिव की बैठक में एसीएस दीपाली रस्तोगी, संजय कुमार शुक्ला और प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह चिंता जता चुके हैं।

ये भी पढ़ें

एमपी के 4 जिलों के किसानों को 2 लाख रुपए की खास योजना, शिवराजसिंह चौहान ने किया ऐलान

विधानसभा में भी उठ चुका मुद्दा
जमीनी विवादों का मुद्दा विधानसभा तक पहुंच चुका है। वन मंत्री दिलीप अहिरवार ने सदन में स्वीकार किया कि कई निजी जमीनें वन विभाग के अधीन दर्ज हैं। केवल शहडोल वन वृत्त में ही 4200 हेक्टेयर से अधिक निजी भूमि पर विभाग का नियंत्रण है। यह स्थिति अन्य वन क्षेत्रों की गंभीरता का भी संकेत देती है।

सीएस बनते ही पूर्व IAS राणा के पति की जमीन वन भूमि से हटी

सीहोर के इच्छावर में खसरा 122/13 की 0.1090 हेक्टेयर जमीन पूर्व सीएस वीरा राणा के आइपीएस पति संजय और इसी तहसील में खसरा 122/7 की 1.2140 हेक्टेयर जमीन पूर्व सीएस एवी सिंह की है। दोनों पावरफुल लोगों की यह जमीन सीहोर सामान्य वन मंडल की लावाखेड़ी बीट के कक्ष क्रमांक 349 में वन भूमि के रूप में दर्ज थी। वन विभाग ने दोनों को मई 2022 में नोटिस दिए और व्यावसायिक उपयोग करने से रोका था।

फरवरी 2025 में जब वीरा राणा राज्य की मुख्य सचिव थीं, तभी वन विभाग के तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक मनोज अग्रवाल ने अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्य आयोजना को पत्र लिखकर जानकारी दी कि ये जमीनों का मूल स्वरूप वन भूमि से हटा दिया है। अर्थात दोनों की जमीनें वन विभाग ने दखल से बाहर कर दी थी।

प्रभावितों को ही नहीं, मप्र को भी नुकसान

प्रभावित लोग खुद की जमीन व्यावसायिक उपयोग नहीं कर पा रहे। वन मामलों के जानकार राजकुमार सिन्हा ने कहा कि इसका अप्रत्यक्ष खामियाजा प्रदेश को ही उठाना पड़ रहा।

जमीनी विवाद के हजारों मामले कोर्टों में लंबित है। अधिवक्ता निकुंज गर्ग बताते हैं, ऐसे मामलों में मैन पावर के साथ राशि खर्च के साथ निर्णय पक्ष में नहीं होने से छवि खराब होती है।

वनखंडों में शामिल निजी जमीनों का रकबा- जमीन हेक्टेयर में

बालाघाट 103.737
बैतूल 65.443
पन्ना 1517.412
छिंदवाड़ा 5215.73
नर्मदापुरम 205.261
दतिया 133.100
सीधी 583.868
सिंगरौली 360.050
सागर 1602.689
दमोह 22.701
सिवनी 1619.791
शिवपुरी 4418.896
गुना 6476.388
अशोकनगर 2505.688
शहडोल 2637.509
अनूपपुर 1392.172
उमरिया 970.850
(नोट: वन विभाग द्वारा विधानसभा में पेश की गई जानकारी के अनुसार।)

ये भी पढ़ें

कर्मचारियों का वेतन नहीं बढ़ा रही मध्यप्रदेश सरकार, आदेश पर अमल नहीं होने से भड़का हाईकोर्ट
Published on:
12 Apr 2026 09:31 am
Also Read
View All