
Robotic Surgery :मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित देश के प्रसिद्ध एम्स भोपाल के चिकित्सकों ने एक बार फिर अपने कौशल और तकनीक के दम पर रीढ़ की गंभीर विकृति से परेशान 16 वर्षीय किशोर को नई जिंदगी देने का काम किया है। बता दें कि, किशोर लंबे समय से स्कोलियोसिस जैसी जटिल बीमारी से ग्रस्त था। मरीज की रोबोटिक और आधुनिक न्यूरोमॉनिटरिंग तकनीक से सफल सर्जरी की गई। इलाज के बाद मरीज की रीढ़ की हड्डी सीधी हो गई है।
इस सफलता ने रीढ़ की जटिल बीमारियों से जूझ रहे अन्य मरीजों के लिए नई उम्मीद जगाई है। दरअसल, स्कोलियोसिस बीमारी में रीढ़ एक ओर मुड़ जाती है। इससे शरीर का संतुलन बिगड़ता है। कंधे, कमर की बनावट प्रभावित होती है। भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
एम्स में जांच के बाद अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज कुमार मिश्रा और टीम ने रोबोटिक सर्जरी करने का फैसला लिया। इसमें न्यूरोमॉनिटरिंग तकनीक का उपयोग किया गया। इस सर्जरी में तंत्रिकाओं की लगातार निगरानी होती रही। ये गहन और जटिल सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत की गई है। एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. प्रणिता मंडल और उनकी टीम ने भी सर्जरी को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
अस्थिरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. रेहान-उल-हक ने इस बेहद जटिल सर्जरी के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि, रोबोटिक तकनीक रीढ़ की जटिल सर्जरी को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना रही है। संस्थान के प्रभारी निदेशक प्रो. डॉ. माधवानन्द कर के अनुसार, अब ऐसे मरीजों को अत्याधुनिक उपचार के लिए बड़े शहरों का रुख करने की जरूरत नहीं है। ये सफलता प्रदेश के रीढ़ रोगियों के लिए नई उम्मीद की किरण साबित हुई है।