मध्यप्रदेश की दो छात्राओं ने बताया आंखों देखा हाल, दहशत में जी रहे भारतीय छात्र, दूतावास से नहीं मिल रहा ठोस जवाब
Russia Ukraine War के हालातों से जूझ रहे यूक्रेन का माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है। यूक्रेन के सूमी sumy शहर में स्थिति खराब है। दहशत का आलम ये है कि हॉस्टलों में फंसे भारतीय छात्रों की नींद अब गोलियों की आवाज सुनकर खुलती है।
सुमी sumy शहर की स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में MBBS की छात्रा इशिका सरकार ने वहां के दहशत भरे हालातों के साझा किए हैं। पत्रिका से खास बातचीत में मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की इशिका सरकार ने बताया कि अब यहां के हालात बेहद खराब हो रहे हैं। पहले गोलियों की आवाज दूर सुनाई देती थी। अब ऐसा लगता है कि जैसे हॉस्टल के आसपास ही गोलीबारी हो रही है। इशिका ने कहा कि पिछले 10 दिन से हम ये सब झेल रहे हैं। समझ में नहीं आता कि हालात कब ठीक होंगे और सरकार कब हमें बाहर निकालेगी।
भारतीय दूतावास से मिल रहा अलग-अलग जवाब
इशिका ने बताया कि जब हम भारतीय दूतावास indian embassy से संपर्क करते हैं तो हर बच्चे को अलग-अलग जवाब दिया जाता है। खुद से व्यवस्था करके जाने को कहा जाता है। दूतावास के लोगों को ये तक नहीं पता कि यहां रेलवे स्टेशन बंद हैं, वो कहते हैं ट्रेन से आ जाओ।
खाने-पीने का स्टॉक भी हो रहा समाप्त
इशिका ने वहां के दयनीय हालातों को बताते हुए कहा कि अब हमारे पास खाने- पीने का स्टॉक भी खत्म हो रहा है। लाइट किसी भी वक्त जा सकती है। पानी की इतनी किल्लत है कि हमें बर्फ को एकत्रित करके उसे पानी बनाकर काम चलाना पड़ रहा है।
हमारी केंद्रीय मंत्री सिंधिया से बात करवा दीजिए
सूमी के हॉस्टल में फंसी मध्यप्रदेश की छात्राओं ने कहा कि हमारी मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया Jyotiraditya Scindia से बात करवा दीजिए। आखिर हमारी बात क्यों नहीं सुनी जा रही। हर प्रदेश के मंत्री अपने लोगों को निकलवा रहे हैं, लेकिन मध्यप्रदेश के छात्रों को क्यों वहां की सरकार नहीं निकलवा रही।
CM हेल्पलाइन से मिले जवाब ने तोड़ी उम्मीदें
सूमी शहर में फंसी देवास की छात्रा दीपिका और छिंदवाड़ा की इशिका ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन से हम मदद मांगकर थक गए, लेकिन वहां से भी उम्मीदें टूट गईं। सीएम हेल्पलाइन से कहा जाता है कि ऑपरेशन गंगा चल रहा है धैर्य रखिए। अब 10 दिन हो गया है और कितना धैर्य रखें।
केन्द्र सरकार का फोकस अब सूमी पर
इधर, ऑपरेशन गंगा operation ganga के तहत अब तक कई छात्रों को वापस लाया जा चुका है। इंडियन एम्बेसी ने बताया कि पिसोचिन और खार्किव में अब कोई भारतीय नहीं है। विदेश मंत्रालय ने सूमी में फंसे छात्रों से कहा कि खार्किव और पिसोचिन के बाद हमारा फोकस सूमी में फंसे भारतीयों को निकालने को लेकर है।