भोपाल की संयुक्ता बैनर्जी ने कहा— मुझे मां का सुख लेना था, बनीं सिंगल मदर
भोपाल. भोपाल की संयुक्ता बैनर्जी को बच्चों से बेहद प्यार है. वे अभी सिंगल हैं, इसलिए कई बार बच्चा गोद लेने की भी कोशिश की. आखिरकार उनकी चाहत पूरी हुई और वे स्पर्म डोनेशन से बेटे को जन्म देकर मां बन गई. 37 साल की संयुक्ता बैनर्जी ने पिछले माह बेटे को जन्म दिया है. वे कहती हैं- बेटे के बर्थ सर्टिफिकेट पर भले ही उसके पिता का नाम नहीं है पर मैं तो मां बन गई हूं.
संयुक्ता बैनर्जी की 2008 में शादी हुई। पति को बच्चे नहीं चाहिए थे जबकि उनके लिए मातृत्व सुख सबसे जरूरी था। ऐसे में उनमें सन 2017 में तलाक हो गया. मातृत्व सुख के लिए उन्होंने बच्चा गोद लेने का विचार किया. बच्चा गोद लेने के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण में रजिस्ट्रेशन कराया, लेकिन उनकी चाहत पूरी नहीं हुई। इसके बाद भी उनकी कोशिश जारी रही.
डॉक्टर ने उन्हें सेरोगेसी, आईसीआई, आईवीएफ, आईयूआई जैसी तकनीकों के बारे में बताया जिनमें पार्टनर के बिना भी मां बना जा सकता है। इस पर उन्होंने आईसीआई तकनीक को अपनाया जिसमें किसी के संपर्क में आए बिना स्पर्म डोनेशन लेते हैं। डोनर भी गोपनीय रहता है। अंतत: 24 अगस्त को उनका सपना पूरा हो गया जब उन्होंने बेटे को जन्म दिया।
बच्चों से प्यार के कारण उन्होंने टेस्ट ट्यूब बेबी पर विचार किया और सरोगेसी से भी बच्चा जन्म देने के बारे में सोचा था। संयुक्ता बैनर्जी ने बताया कि समाज में अभी भी बिना शादी के मां बनना पाप माना जाता है पर उन्हें अपने फैसले पर गर्व है। बच्चे के प्यार के आगे यह बात मायने नहीं रखती। परिवार, दोस्त और खासकर मेरी मां ने साये की तरह मेरा साथ दिया।
संयुक्ता बैनर्जी ऑल इंडिया रेडियो में न्यूज ब्रॉडकास्टर हैं। मातृत्व सुख के लिए उन्होंने समाज के रीति-रिवाजों को तोड़ दिया। बिना पार्टनर के मां बनने के उनके निर्णय का जहां कुछ लोगों ने विरोध किया वहीं कुछ ने जबर्दस्त साथ भी दिया. कुछ दोस्तों ने उनकी पसंद की दिनचर्या बना ली। किसी ने पसंदीदा व्यंजन भेजे, तो किसी ने अचार भेजा। इस तरह वे मां बनने के सपने को पूरा करने में सफल रहीं.