bhopal-dewas tiger corridor: भोपाल-देवास बाघ कॉरिडोर को जोड़ने वाला प्रस्तावित सरदार पटेल अभयारण्य टल गया। विरोध और भ्रम के चलते सरकार ने सीहोर-देवास वन क्षेत्रों में प्रक्रिया रोक दी है। (mp news)
mp news: भारी विरोध के बीच सरकार ने प्रस्तावित सरदार वल्लभ भाई पटेल वन्यजीव अभयारण्य के गठन की प्रक्रिया स्थगित कर दी है। यह अभयारण्य सीहोर और देवास वन मंडल की सीमा में बनाया जा रहा है, जो देवास के खिवनी वन्यजीव अभयारण्य से डॉ. विष्णु वाकणकर टाइगर रिजर्व (पुराना नाम रातापानी टाइगर रिजर्व) को जोड़ता था। यह कवायद बाघों की बढ़ती आबादी और वर्षों पुराने भोपाल-देवास प्राकृतिक बाघ कॉरिडोर (bhopal-dewas tiger corridor) को जिंदा करने के लिए की जा रही थी।
अतिक्रमणकारियों को हटा रहा था, जिसको लेकर विरोध भड़क गया था। इसी बीच स्थानीय स्तर पर कुछ दलों के लोगों ने पूरे मामले को हवा दी और राजनीतिक षड्यंत्रों के तहत स्थानीय लोगों में भ्रम फैलाया कि नया अभयारण्य बना तो अधिकार छिन जाएंगे। पहले मामले को कांग्रेस ने हवा दी।
बाद में मामला केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान तक पहुंचा तो उन्होंने भी आपत्ति दर्ज कराई। शिवराज आदिवासियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ रविवार को मुख्यमंत्री से मिले थे। चंद समय बाद सीहोर डीएफओ मगन सिंह डाबर को हटाया था। अब चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन शुभरंजन सेन ने अभयारण्य के गठन की प्रक्रिया स्थगित करने संबंधी निर्देश जारी किए।
डॉ. विष्णु वाकणकर टाइगर रिजर्व की सीमा भोपाल से लगी है। 30 से अधिक बाघ और सैकड़ों तेंदुए है। रिजर्व बनने के बाद संरक्षण की कवायद तेज होगी और इनकी संख्या बढ़ेगी। वन्यप्राणी विशेषज्ञ आरके दीक्षित का कहना है कि मांसाहारी वन्यजीव बढ़ने से शाकाहारी वन्यजीव कम होते हैं, इसके लिए बड़े स्तर पर प्रबंधन की जरूरत होती है, जो कि कई बार गड़बड़ा जाता है।
ऐसी स्थिति में बाघ, तेंदुओं का मूवमेंट पालतू मवेशियों को खाने के लिए भोपाल की ओर बढ़ना तय है। पूर्व में भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। इसके लिए जरूरी होगा कि सहमति बनाकर प्रस्तावित सरदार वल्लभ भाई पटेल अभयारण्य के गठन की प्रक्रिया पूरी की जाए। ऐसा करने से डॉ. विष्णु वाकणकर व खिवनी अभयारण्य जुड़ेंगे। बाघों को लंबा कॉरिडॉर मिलेगा। पूर्व में यह कॉरिडोर था, जहां से बाघों का मूवमेंट भी देखा गया, लेकिन विकास के साथयह खंडित हुआ है।