प्रदेश में 17 साल बाद खिलाड़ी सीधे दरोगा और सिपाही बन सकेंगे। ओलम्पिक व एशियाड के पदक विजेताओं को डीएसपी रैंक दी जाएगी।
सतेंद्र सिंह भदौरिया @ भोपाल। प्रदेश में 17 साल बाद खिलाड़ी सीधे दरोगा और सिपाही बन सकेंगे। ओलम्पिक व एशियाड के पदक विजेताओं को डीएसपी रैंक दी जाएगी। ओलंपिक, एशियाड, अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाडिय़ों को पुलिस विभाग में सरकारी नौकरी देने के लिए मसौदा तैयार कर लिया गया है। पुलिस व खेल विभाग ने इसे मुख्य सचिव को भेजा है। इसका प्रस्ताव जल्द ही मंजूरी के लिए कैबिनेट में प्रस्तुत किया जा सकता है। यहां से हरीझंडी मिलते ही खिलाडिय़ों को पुलिस विभाग में नौकरी मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। पहले खेल कोटे से पुलिस में सीधी भर्ती का नियम था। इसे वर्ष 2000 में खत्म कर दिया था।
नहीं देना होगी परीक्षा
प्रस्ताव के मुताबिक पदक विजेताओं को कोई लिखित या शारीरिक परीक्षा नहीं देनी होगी। वे खेल विभाग की तरफ से एक ट्रायल देकर सीधे खाकी पहन सकेंगे। इसके पीछे खेल विभाग का मानना है कि प्रदेश के खिलाड़ी कुछ सालों से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, जिन्हें रेलवे, सेना और अन्य विभाग नौकरी दे देते हैं, लेकिन राज्य में उन्हें यह लाभ नहीं मिल पाता।
यह है सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में
प्रस्ताव के मुताबिक ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स,एशियाड, अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर शामिल किसी भी खेल में पदक जीतने वाले खिलाडिय़ों को ही यह लाभ मिलेगा। ओलंपिक पदक विजेताओं को पुलिस में सीधे डीएसपी या अन्य सेवाओं में समकक्ष पद मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय खेलों के पदक विजेताओं को सब इंस्पेक्टर व राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में पदक जीतने वाले खिलाडि़यों को सिपाही की नौकरी दी जाएगी। आपको बता दें कि पुलिस व खेल विभाग ने इसे मुख्य सचिव को भेजा है। इसका प्रस्ताव जल्द ही मंजूरी के लिए कैबिनेट में प्रस्तुत किया जा सकता है। यहां से हरीझंडी मिलते ही खिलाडिय़ों को पुलिस विभाग में नौकरी मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। पहले खेल कोटे से पुलिस में सीधी भर्ती का नियम था। इसे वर्ष 2000 में खत्म कर दिया था।