भोपाल

किताबों की सूची सार्वजनिक करने को तैयार नहीं स्कूल, फिर होगा करोड़ों का ‘खेला’

अभिभावकों को महंगी किताबें खरीदने को मजबूर कर लगाई जा रही करोड़ों की चपत नियमों के बावजूद बड़े पुस्तक विक्रेताओं से सांठगांठ के ढर्रे पर चलने को तैयार स्कूल

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Jan 31, 2022
किताबों की सूची सार्वजनिक करने को तैयार नहीं स्कूल, फिर होगा करोड़ों का 'खेला'

भोपाल. अगले शैक्षणिक सत्र में स्कूल में किन किताबों से अध्ययन कराया जाएगा? क्या सभी किताबें पिछली वर्ष की तरह यथावत रहेंगी या कोई बदलाव होगा, इसकी जानकारी निजी स्कूलों को जनवरी माह में सार्वजनिक करनी थी। लेकिन पूरा महीना बीतते तक किसी स्कूल ने इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं र्की है। ऐसे में स्कूलों की ओर से एक बार फिर बड़े पुस्तक विक्रेताओं के साथ सांठ-गांठ किए जाने और अभिभावकों को तय दुकानों से ही महंगी किताबों के सेट खरीदने के लिए मजबूर कर करोड़ों का 'खेलÓ किए जाने की आशंका है।
नियमों अनुसार निजी स्कूलों को जनवरी तक किताबों की सूची जारी करनी थी।

अब तक स्कूलों ने न तो सूची जारी की है, न ही यह स्पष्ट किया है कि पिछले वर्ष के किताबों के सेट में कितना बदलाव होगा या यही किताबें यथावत रहेंगी। बीते वर्ष दिसम्बर में मप्र सरकार ने राजपत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि, निजी स्कूलों को नए शैक्षणिक सत्र से 90 दिन पहले या जनवरी आखिर तक नए सत्र की पुस्तकों की सूची सार्वजनिक करनी होगी, और इसे बोर्ड पर भी चिपकाना होगा। स्कूलों को पुस्तकों की सूची शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अपलोड करनी है तो जिला शिक्षा अधिकारी को भी भेजना है। लेकिन अधिकांश स्कूलों ने अपनी साइट पर पुरानी किताबों की सूची ही प्रदर्शित कर रखी है। इसे अपडेट करने के साथ शिक्षा विभाग के पोर्टल और अधिकारियों को सूचित ही नहीं किया।

फैक्ट फाइल

जिले में सीबीएसई स्कूल- 105
एक स्कूल में औसतन विद्यार्थी- 1000

कुल विद्यार्थी- 1,00,000
निजी स्कूलों का किताबों का कुल कारोबार- 100 करोड़ से अधिक

(आंकड़े अनुमानित)

अभिभावकों के पास कोई विकल्प नहीं रहता

स्कूलों को शैक्षणिक सत्र के पहले किताबों की जानकारी सार्वजनिक करने के आदेश हैं। दरअसल स्कूल संचालकों और प्रकाशकों का गठजोड़ होता है जो अभिभावकों से हर साल करोड़ों की ठगी कर रहा है। यदि अभिभावकों को दिसम्बर-जनवरी में होने वाले एडमिशन के समय यदि यह पता चल जाए कि किताबें कितने की पड़ेंगी, डे्रस के नाम पर कितना खर्च होगा, तो वह स्कूल बदल सकते हैं। इसलिए स्कूल आखिरी तक जानकारी नहीं देते और मार्च में अभिभावकों के पास कोई विकल्प नहीं रहता और वे फंस चुके होते हैं। सीबीएसई, दिल्ली और मद्रास हाईकोर्ट साफ शब्दों में कह चुका है कि स्कूलों में एनसीईआरटी की ही किताबें चलनी चाहिए, इसके बावजूद अलग-अलग किताबें चल रही हैं।
प्रबोध पंड्या, महासचिव, पालक महासंघ

इस सम्बंध में जिले के अधिकारियों को निर्देश देकर किताबों की सूची पोर्टल पर अपलोड कराने और ऐसा नहीं करने वालों पर कार्रवाई के लिए निर्देशित करता हूं।

राजीव तोमर,संयुक्त संचालक, भोपाल

Published on:
31 Jan 2022 07:15 am
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