मध्यप्रदेश में भाजपा किसे मुख्यमंत्री बनाएगी, इसे दो लेकर राजनीति से लेकर प्रशासनिक गलियारे में खासी चर्चा थी। प्रदेश के लोग भी जानना चाहते थे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी क्या चौथी बार शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनने का मौका देंगे। मोदी की पहली पसंद बनने में कामयाब हुए शिवराज को आखिरकार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिल ही गया। इसी के साथ मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड शिवराज के नाम दर्ज हो गया। ऐसे हुआ शिवराज का चयन शिवराज के मुख्यमंत्री की कहानी पिछली तीन
कांग्रेस की सरकार गिराने की स्क्रिप्ट जब दिल्ली मे लिखी जा रही थी तो भाजपा इस पर भी विचार कर रही थी कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते थे कि शिवराज को फिर से मौका दिया जाए, लेकिन गृहमंत्री अमित शाह और कुछ नेताओं की इच्छा थी कि इससे लीडरशिप डेवलप नहीं होगी, इसलिए नए चेहरे को मौका मिलना चाहिए।
शिवराज सिंह के साथ ही केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा सीएम पद के गंभीर दावेदार थे। इस बीच थावरचंद गेहलोत का नाम भी चर्चा में आया। ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा के खेमे में आने से कांग्रेस की सरकार गिरी और भाजपा को सत्ता में जाने का मौका मिला। हालांकि इसके पहले ऑपेरशन लोटस पार्ट-1 फेल हो चुका था।
सिंधिया को भाजपा में लाने का श्रेय केंद्रीय संगठन और खासकर अमित शाह को है। पार्टी ऐसे मौके पर सत्ता की कमान ऐसे अनुभवी चेहरे को देना चाहती थी जो सभी को साथ लेकर चल सके। भाजपा के सामने 24 उपचुनाव की चुनौती भी है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व को शिवराज ही सबसे बेहतर नजर आए। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी तोमर और मिश्रा की जगह शिवराज को ही मुख्यमंत्री बनाने पर सहमति दी।
नरेंद्र ङ्क्षसह तोमर केंद्र में कृषि और पंचायत ग्रामीण विकास जैसे वजनदार विभागों के मंंत्री हैं। सूत्रों के मुताबिक उन्हें कहा गया है कि भविष्य में संगठन उनके लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेगा। उधर नरोत्तम मिश्रा को सिंधिया समर्थक तुलसी सिलावट के साथ उप मुख्यमंत्री बनाकर संतुष्ट किया जा सकता है।