sick building syndrome : यदि आपको बिना किसी कारण के बार-बार अलग-अलग बीमारियों के लक्षण पैदा होते रहते हैं। इनमें से कुछ लक्षण लगातार चलते हैं और कुछ एक समय के बाद खत्म हो जाते हैं तो सावधान हो जाएं। क्योंकि यह सिक बिल्डिंग सिंड्रोम हो सकता है।
यह समस्या आपके रहने और काम करने वाली बिल्डिंग की स्थितियों के कारण पैदा होती है। मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ पीके त्रिपाठी के अनुसार इसके लक्षण संबंधित भवन में बढ़ जाते हैं जबकि वहां से निकलने पर राहत मिलती है। जेपी में हर महीने 7-8 मरीज पहुंच रहे हैं।
हल्का बुखार रहना
सिरदर्द, चक्कर आना,
मतली, आंख, नाक या गले में जलन
सूखी खांसी, सूखी या खुजली वाली त्वचा
अस्थमा के दौरे बढऩा
सांस लेने में तकनीफ
sick building syndrome - यह हैं कारण
रासायनिक कारक - बाथरूम और रसोई में चूहों, कॉकरोच आदि के लिए उपयोग कीटनाशक पदार्थ।
जैविक कारक - बैक्टीरिया, वायरस, फंगस आदि शामिल हैं। ये रुके हुए पानी में पनपते हैं।
अपर्याह्रश्वत वेंटिलेशन- ऑफिस या घर में खिड़कियों की कमी, वायु निकासी की पर्याह्रश्वत व्यवस्था न होना।
रेडिएशन- मोबाइल, माइक्रोवेव, टेलीविजन और कंप्यूटर जैसे गैजेट के रेडिएशन से
मनोवैज्ञानिक कारक - अत्यधिक तनाव, असंतोष, खराब पारस्परिक संबंध व खराब संचार बड़ा कारण।
sick building syndrome - बचाव के लिए यह करें
-घर और कार्य स्थल में पर्याप्त वेंटिलेशन और हवा का आवागमन बढ़ाएं।
-पानी से सने छत टाइल्स और कालीनों को बदल दें। वाटर प्रूफिंग कराएं।
-कम से कम कीटनाशकों और रसायनों का उपयोग करें।
-इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं और निष्क्रिय उपकरणों को अनप्लग करके रखें।
-हवा से प्रदूषक सोखने वाले इनडोर पौधों को लगाएं।
-कार्यस्थल में धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाएं।
दफ्तरों के लिपिकवर्गीय कर्मचारी ज्यादा प्रभावित
आमतौर पर यह बीमारी सरकारी दफ्तरों के लिपिक वर्गीय कर्मचारियों में ज्यादा देखने को मिलती है। क्योंकि उच्चाधिकारियों के बैठने की जगह अच्छी होती है लेकिन इनके बैठने के लिए बहुत कम जगह होती है कई बार यह सीलन भरी होती है और यहां नियमित सफाई भी नहीं होती है। सरकारी आवास भी सीलन भरे रहते हैं। इससे कर्मचारियों की कार्यकुशलता कम हो जाती है और अनुपिस्थति भी बढ़ जाती है और कामकाज प्रभावित होता है।