
भोपाल। प्रतिबंधित संगठन सिमी के 5 आतंकियों अब्दुल अजीज, जावेद, अब्दुल वाहिद, जुबेर और मोहम्मद आदिल को अदालत ने उम्रकैद और 10-10 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई है। एनआइए एक्ट के विशेष सत्र न्यायाधीश गिरीश दीक्षित ने देशद्रोह के मामले में यह सजा सुनाई है।
जिला अभियोजन अधिकारी राजेन्द्र उपाध्याय के अनुसार, एटीएस ने 1 जनवरी 2014 को महिदपुर के किदवई मोहल्ला स्थित खंडहर से सिमी आतंकियों के पास से विस्फोटक बरामद किया था। एटीएस को देखकर आतंकियों ने बचने की कोशिश भी की, लेकिन उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
वारदात को अंजाम देने की थी तैयारी
आतंकियों ने कबूल किया कि वे प्रदेश में बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे। एटीएस ने आतंकियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया था।
अदालत ने सह आरोपी अबू फैजल, उमेर दण्डोती, साजिद, सादिक और इरफान नागौरी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। फिलहाल राजधानी की सेंट्रल जेल में 29 सिमी आतंकी हैं। इनकी पेशी जेल से ही वीडियो कॉन्फेंस के जरिए कराई जा रही है।
इधर, करगिल युद्ध में घायल कर्नल की पेंशन को लेकर विभाग को लगा जुर्माना...
करगिल युद्ध में अपनी जान दांव पर लगाने वाले महू के कर्नल मदनलाल गोपाल सिंह नागी के पक्ष में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। आयकर विभाग ने उन्हें मिलने वाली नि:शक्तता पेंशन से आयकर काट लिया था।
इसके बाद कर्नल ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस वीरेंद्र सिंह की पीठ ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए वसूले गए आयकर की पूरी राशि 12 फीसदी ब्याज के साथ 30 दिन में लौटाने कहा है। इसके बाद विभाग को 18 फीसदी ब्याज चुकाना होगा। विभाग पर एक लाख का जुर्माना भी लगाया है। यह राशि सैनिक वेलफेयर फंड में जमा होगी।
2008 में हुए थे सेवानिवृत्त...
1999 के करगिल युद्ध में कर्नल नागी को गंभीर चोट से 30 प्रतिशत तक नि:शक्तता आ गई थी। 40 साल तक लगातार नौकरी करने के बाद वे 2008 रिटायर हुए।
नियमों के अभाव में देते रहे आयकर...
कर्नल नागी के एडवोकेट यतीश कुमार लाड़ ने बताया, रिटायरमेंट के बाद उन्हें सरकार ने पेंशन देना शुरू किया था। वे 2008 से 2016 तक हर साल आयकर जमा करते रहे। फिर जानकारी मिली कि ऐसी पेंशन आयकर मुक्त होती है।
कर्नल ने 2008 से 2016 तक दिए गए आयकर की 11 लाख 16 हजार 643 रुपए की राशि वापस करने के लिए आयकर विभाग को आवेदन किया। सुनवाई नहीं होने पर अगस्त 2018 को फिर आग्रह किया। विभाग सेे जवाब नहीं मिलने पर हाईकोर्ट की शरण ली।