
भोपाल। पुराने खसरों से रेकॉर्ड को सॉफ्टवेयर पर लाना जनता के लिए परेशानी का सबब बन गया है। किया तो ये अच्छे के लिए, लेकिन हो उल्टा गया। ऑनलाइन रेकॉर्ड पर आते-आते लोगों की जमीनों में भारी अंतर आ गया है। जब उन्हें पता चलता है कि कागजों में उनकी जमीन गड़बड़ हो गई है और पड़ौसी की जमीन अचानक बढ़ गई है तो उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाती है। ठीक कराने के लिए वे छह-छह माह से तहसील हुजूर के चक्कर काट रहे हैं , लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। कभी उनसे पुराने खसरे निकलवा रहे हैंं तो कभी बोला जाता है कि अभी के खसरे ले आओ। इस वजह से लोगों के बैंक के लोन तक अटक गए हैं।
केस एक-
अयोध्या नगर निवासी रामपाल शर्मा ने तीन साल पहले अयोध्या नगर में पंद्रह सौ वर्ग फीट का प्लॉट खरीदा था। रजिस्ट्री के बाद तहसील में नामांतरण भी करा लिया, लेकिन कम्प्यूटर ऑपरेटर ने पन्द्रह सौ की जगह एक हजार वर्गमीटर की एंट्री कर दी। जिसकी वजह से रेकार्ड में जमीन कम हो गई। कई बार तहसील के चक्कर काटे लेकिन रेकार्ड सही नहीं हो पा रहा।
केस दो-
सरोज पांडे की भौंरी में १० हजार स्क्वायर फीट जमीन है, कुछ समय समय पहले बैंक से लोन लेने के लिए एप्लाई किया। लोन के लिए अपडेट खसरे की जरूरत महसूस हुई तो तहसील हुजूर से खसरा निकलवाया। देखने के बाद पता चला कि पांच हजार स्वायर फीट जमीन ही रह गई है। जबकि पड़ौस की जमीन में अचानक से इजाफा हो गया। इस मामले में पुराने खसरे में जमीन पूरी निकली। एसडीएम के ऑर्डर के बाद अभी तक खसरा अपडेट नहीं हो पा रहा है।
न जाने कितने लोगों का रेकॉर्ड हो गया गड़बड़
ये तो चंद मामले में जिनमें किसी न किसी वजह से लोगों को पता चल गया कि रेकार्ड में गड़बड़ी हो गई है। एेसे न जाने कितने लोग और हैं जिन्हें पता ही नहीं होगा कि उनका रेकॉर्ड गड़बड़ है। वे अभी भी पुराने खसरे लेकर बैठे हैं, जबकि सॉफ्टवेयर में नया रेकॉर्ड अपडेट हो चुका है। उसी में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आ रही है।
वर्जन
एेसे मामलों में निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द दस्तावेजों के आधार पर लोगों का रेकॉर्ड अपडेट करें।
संतोष वर्मा, एडीएम