स्टैंड-अप कॉमेडियन हमारे जीवन में हंसी का संचार करने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। वे अपनी कला और हास्य की प्रतिभा का उपयोग करके लोगों को हंसाते हैं। पत्रिका ने शहर के ऐसे ही कुछ स्टैंडअप कॉमेडियन से बात कर जाना उनका अनुभव...आप भी पढ़ें...
जब हम किसी को हंसता देखते हैं तो बहुत खुशी महसूस करते हैं। हंसी... एक ऐसा शब्द है, जिसे सुनते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। यह एक ऐसा अद्भुत अनुभव है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। आज के दौर में जब जिंदगी की भागदौड़ में हम अक्सर तनाव और चिंताओं में घिरे रहते हैं, ऐसे में स्टैंड-अप कॉमेडियन हमारे जीवन में हंसी का संचार करने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। वे अपनी कला और हास्य की प्रतिभा का उपयोग करके लोगों को हंसाते हैं। पत्रिका ने शहर के ऐसे ही कुछ स्टैंडअप कॉमेडियन से बात कर जाना उनका अनुभव।
मैंने साल 2017 में स्टैंडअप कॉमेडी शुरू की थी। मैं कपिल शर्मा शो देखकर इंस्पायर हुआ और मैंने यूट्यूब पर कुछ स्टैंडअप कॉमेडियंस को भी देखा, फिर मैंने सोचा कि मुझे भी इसमें ट्राय करना चाहिए। शुरुआत में लोगों को हंसाना मुश्किल होता है। ऐसा भी होता है कि जो जोक हमें फनी लगे, उस पर लोग न हंसे, क्योंकि सबकी वाइब अलग होती है। मैं अब तक 200 से ज्यादा शो कर चुका हूं और मैंने देखा है कि जो मेरी लाइफ में घटा है, लोग उन जोक्स पर ज्यादा हंसते हैं। लगभग 15 मिनट के जोक को तैयार करने में 1 साल का समय लग जाता है।
सबसे मुश्किल कला है किसी को हंसाना। मैं अक्सर जोक के साथ संदेश देने की कोशिश करता हूं। शो करने से पहले खूब प्रैक्टिस करता हूं। यह जरूरी नहीं है कि ऑडियंस से बातचीत करेंगे तो ही अच्छा कंटेंट तैयार होगा। मैंने देखा है कि कंटेंट मैटर नहीं करता ऑडियंस के साथ एक वाइब और कनेक्शन बनाना पड़ता है फिर वह आपके जोक्स पर हंसते हैं। 10 मिनट तक हंसाने के लिए लगभग एक साल की मेहनत लगती है। भोपाल में ओपन माइक का क्रेज कम है। बड़े शहरों में इसे काफी पसंद किया जाता है मैं चाहता हूं कि भोपाल में भी ये ट्रेंड आए।
लोगों के जीवन में तनाव और दुख बहुत हैं। लोग आजकल हंसना भूल गए हैं। मैं अपने आप को भाग्यशाली मानता हूं कि ईश्वर ने मुझे लोगों को हंसाने के लिए चुना है। मैं पिछले 35 सालों से मिमिक्री, कॉमेडी, जोक्स आदि कंटेंट से लोगों को स्टेज से हंसा रहा हूं। बचपन में मैं टीचर्स, दोस्तों आदि की कॉपी किया करता था। फिर सभी ने मुझे कहा कि मैं लोगों को अच्छा हंसाता हूं तो मैंने इसी को अपना प्रोफेशन बनाया। मैं मंच से लोगों को हंसता देखता हूं तो बहुत सुकून मिलता है। आज की युवा पीढ़ी वल्गर कॉमेडी को पसंद करती है। फैमिली ड्रामा का रुझान धीरे-धीरे खत्म होते जा रहा है। यह चिंता का विषय है। -