
Meenakshi Natarajan Case- राज्यसभा चुनाव में मध्यप्रदेश से कांग्रेस की प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन को रिटर्निंग अधिकारी द्वारा अपना नामांकन निरस्त कर दिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी निराशा मिली है। शुक्रवार को इस मामले में कांग्रेस की याचिका को शीर्ष कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह नॉन मेंटेनेबल यानि अग्राह्य है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली में ही राष्ट्रपति से मिलने के लिए कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश के 61 पार्टी विधायकों के साथ मार्च किया। पुलिस ने उन्हें रोका और झड़प के बाद सभी को हिरासत में ले लिया। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद राज्यसभा सीट की लड़ाई को निर्णायक दौर पर पहुंचाने के लिए कांग्रेस Congress के पास सीमित विकल्प बचे हैं। इस संबंध में प्रमुख नेताओं ने अपनी रणनीति स्पष्ट भी की है। मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि चुनाव आयोग की मिलीभगत से भाजपा ने नामांकन रद्द करवाया है। उन्होंने कहा कि अब हम जनता की अदालत में जाएंगे।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद भोपाल से शुरु हुए कानूनी संघर्ष को नई दिल्ली में जोरदार ब्रेक लगा। यहां नटराजन को सुप्रीम झटका मिला। शीर्ष कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी।
मीनाक्षी नटराजन ने कहा, फैसले पर टिप्पणी नहीं करूंगी, लेकिन लोकतंत्र में जनता की अदालत भी होती है। अब हम न्याय के लिए वहां जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिस केस के आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन रद्द किया, उसे बताने की जरूरत नहीं थी, क्योंकि इसमें एफआइआर दर्ज नहीं है।
पार्टी ने अब राज्यसभा सीट की इस लड़ाई को जनता की अदालत में ले जाने का ऐलान किया है। जंतर-मंतर पर सत्याग्रह की घोषणा की। कांग्रेस के 4 प्रमुख नेताओं ने इस संबंध में अहम बयान दिए-