विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कदम शिक्षा, अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए लिया गया है। आने वाले समय में व्यवस्था को और हाईटेक और सेंट्रलाइज्ड किया जाएगा। शिक्षक वर्ग के लिए यह नियम किसी चुनौती से कम नहीं है, खासतौर पर अब मुश्किलें उन प्रोफेसर के सामने आएंगी जो कॉलेज टाइम में किसी शोध या अकादमिक गतिविधियों में बिजी रहते थे।