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इन 3 कारणों से सुप्रीम कोर्ट में खारिज हुई मीनाक्षी नटराजन की याचिका

Meenakshi Natarajan nomination: सुप्रीम कोर्ट कोर्ट के आदेश और सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों से मीनाक्षी नटराजन की याचिका को खारिज करने के तीन प्रमुख आधार उभरकर सामने आए।

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भोपाल

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Akash Dewani

Jun 12, 2026

Meenakshi Natarajan nomination petition was dismissed in Supreme Court for these three reasons Rajya Sabha Elections

Meenakshi Natarajan nomination Row: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की मीनाक्षी नटराजन की रिट याचिका (फोटो सोर्स- Patrika)

Rajya Sabha Elections: कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन (Meenakshi Natarajan nomination) को लेकर शुक्रवार को राजनीति गर्म रही। एक तरफ प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित एमपी कांग्रेस 61 विधायकों को दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रपति भवन की तरफ जाते हुए गिरफ्तार कर लिया। वहीं, दूसरी तरफ मीनाक्षी नटराजन की रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। हालांकि, सुनवाई के बाद मीनाक्षी को सुप्रीम कोर्ट से भी मायूसी हाथ लगी। कोर्ट ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि ' यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।' कोर्ट ने उन्हें चुनाव याचिका दायर करने की छूट दी है। सुप्रीम कोर्ट कोर्ट के आदेश और सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों से मीनाक्षी नटराजन की याचिका को खारिज करने के तीन प्रमुख आधार उभरकर सामने आए। आइए बताते हैं वो तीन कारण। ……

पहला कारण- संविधान का अनुच्छेद 329 (Article 329)

याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा और एएस चंदुरकर की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 329 का हवाला देते अपने रिट अधिकार क्षेत्र का उपयोग करने से मना कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तब यह अनुच्छेद उन्हें दखल देने से रोकता है। कोर्ट ने कहा कि नामांकन खारिज करने का फैसला सही है या गलत उस पर चुनाव प्रक्रिया के खत्म होने के बाद ही सुनवाई की जा सकती है। इसलिए मीनाक्षी नटराजन की रिट याचिका को सुनवाई के योग्य नहीं मानकर खारिज किया गया।

दूसरा कारण - कोर्ट नहीं तय कर सकता स्पष्ट गलती और साधारण गलती

मीनाक्षी नटराजन के वकील अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि नॉमिनेशन रद्द करने का उनका मामला इतना साफ था कि सुप्रीम कोर्ट दखल दे सकता है। इस पर कोर्ट ने तर्क दिया कि वह यह तय नहीं कर सकता है कि कौन सा नामांकन खारिज करने वाला मामला बहुत स्पष्ट गलती वाला है और कौन सा नहीं। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि अगर कोर्ट ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने लगे तो उसे पहले यह तय करना पड़ेगा कि कौन-सा मामला स्पष्ट गलती वाला है और कौन सा मामला साधारण गलती वाला।

कोर्ट ने कहा कि संविधान में ऐसी कोई भी श्रेणी नहीं बनाई गई है और वह आर्टिकल 329 के सिद्धांत के खिलाफ होगा। कोर्ट ने आगे चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि 'हमें डर है कि अगर वह कुछ मामलों की सुनवाई कर ले और कुछ को इलेक्शन ट्रिब्यूनल के पास भेज दे तो इसका गलत मतलब भी निकाला जा सकता है। कोर्ट ये तय नहीं कर सकता है कि कौन से मामले 'बहुत गलत' मानकर सुन लिए जाए वहीं, जबकि कुछ मामलों को चुनाव ट्रिब्यूनल में भेज दिया जाए।

तीसरा कारण- मामले की सुनवाई हुई तो हर मामला कोर्ट में आएगा

सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अगर वह मीनाक्षी नटराजन की रिट याचिका को स्वीकार कर सुनवाई शुरू करते हैं या नामांकन को मंजूरी देते है तो अनुच्छेद 32 द्वारा दी गई शक्तियों का इस्तेमाल हर चुनावी मामले होना शुरू हो जाएगा। वहीं, अनुच्छेद 329 द्वारा बनाई गई बेड़ियां में टूट जाएंगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि अगर कोर्ट इस मामले की सुनवाई करता है तो फिर भविष्य में जब कभी किसी कैंडिडेट का नामांकन रद्द होगा वह सीधा सुप्रीम कोर्ट जाएगा। इससे यह होगा कि चुनावी विवादों के लिए बनाई गई कानूनी व्यवस्था कमजोर पड़ जाएगी। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों के लिए चुनाव याचिका की कानूनी व्यवस्था दी गई है और मीनाक्षी नटराजन को भी इसी कानूनी व्यवस्था का रास्ता अपनाना चाहिए।