भोपाल

गर्भावस्था में जरूर रखें इस बात का ध्यान, वरना मानसिक रोगी हो सकता है नवजात

Health News : एमपी में करीब 60 लाख से ज्यादा मनोरोगी हैं। इसका 15 से 20 फीसदी पर्सनालिटी डिसऑर्डर से पीड़ित हैं और इनमें से आधे से ज्यादा तो सिर्फ भोपाल में हैं।

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गर्भावस्था में जरूर रखें इस बात का ध्यान (Photo Source- Patrika)

Health News : गर्भावस्था के दौरान गंभीर तनाव में रहने वाली महिलाओं के नवजात बच्चों में मानसिक रोग का खतरा होता है। एनआइसीएचटी की रिपोर्ट के अनुसार, गर्भवतियों के तनाव का उपचार नहीं होने पर बच्चे का प्रारंभिक और मानसिक विकास धीमा हो जाता है। 30 वर्ष की आयु होने पर इन्हें पर्सनालिटी डिसऑर्डर होने का खतरा 10 गुना बढ़ जाता है। उम्र बढ़ने के साथ ही उनमें अवसाद व व्यवहार संबंधी समस्याओं भी होने लगती है।

एक अध्ययन के अनुसार, गर्भावस्था में तनाव लेने वाली महिलाओं में गर्भपात का खतरा 42 प्रतिशत बढ़ जाता है। मनोचिकित्सकों ने बताया कि, मध्य प्रदेश में लगभग 60 लाख से अधिक मनोरोगी हैं। इसका 15 से 20 प्रतिशत पर्सनालिटी डिसऑर्डर से पीड़ित हैं और इनमें से आधे से ज्यादा तो सिर्फ भोपाल में ही हैं।

सीखने की क्षमता कम

विशेषज्ञों के अनुसार, तनाव से नवजात की मस्तिष्क स्थिति ऐसी हो जाती है कि, उसे ध्यान केंद्रित करने और सीखने में समस्या पैदा होती है। संज्ञानात्मक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है साथ ही समय से पहले जन्म, कम वजन वाला बच्चा पैदा होना और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

इसके रोगी जरूरत से जयादा चिंतित, भावनात्मक रूप से अस्थिर, विरोधाभासी और असामाजिक होते हैं। इन्हें अवसाद (डिप्रेशन) होने की आशंकाएं अधिक होती हैं। ये लोग नशा करने लगते हैं। मनोचिकित्सक आरएन साहू ने बताया कि, इस बीमारी में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। ये हार्मोन प्लेसेंटा को पार कर भ्रूण के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकता है।

कैसे कम हो तनाव?

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को घर और दफ्तर में विशेष मदद की जानी चाहिए। उन पर काम का बोझ नहीं डालना चाहिए। तनाव महसूस करने पर उन्हें तनाव से बाहर निकलने के तरीके सुझाए जाने चाहिए। अच्छी डाइट लेने के साथ ही आराम व भरपूर नींद लेनी चाहिए और धूम्रपान से बचना चाहिए।

Published on:
02 Jun 2025 10:51 am
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