भोपाल

एक ऐसा किस्सा: जब हिन्दुस्तान के राष्ट्रपति रो रहे थे, उस समय PM सो रहे थे!

mp.patrika.com तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा की जयंती के मौके पर बताने जा रहा है वह किस्सा जो भोपाल में आज भी याद किया जाता है....।

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Aug 19, 2017

भोपाल। हिन्दुस्तान में कभी ऐसा वक्त भी आता है जब बड़े ओहदे पर बैठे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी असहाय हो जाते हैं। ऐसा ही वक्त उस समय आया था जब देश जलव रहा था हर तरफ खौफ और दंगे-फसाद का माहौल था। हम बात कर रहे हैं 6 दिसंबर 1992 की। इसी दिन दिल्ली में देश के राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा फूट-फूटकर हो रहे थे और प्रधानमंत्री नरसिंहराव अपने बंगले में सो रहे थे। डॉ. शर्मा बाबरी ढांचे का विध्वंस रोकने का प्रयास करना चाहते थे, लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी।

तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा और तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव के कार्यकाल में कई घटनाक्रम हुए, लेकिन उनमें से बाबरी ढांचे का विध्वंस ऐतिहासिक घटना थी।

mp.patrika.com तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा की जयंती के मौके पर बताने जा रहा है वह किस्सा जो भोपाल में आज भी याद किया जाता है। प्रस्तुत है उसी दौर का यह किस्सा...। डॉ. शंकरदयाल शर्मा का जन्म भोपाल में ही हुआ था। 26 दिसंबर 1999 को डॉ. शर्मा का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।

पुस्तक ने किए राज उजागर
कुछ सालों पहले मार्केट में आई एक पुस्तक में इस बात का उल्लेख किया गया है कि जब बाबरी ढांचा ढहाने के लिए कार सेवकों ने चढ़ाई कर दी थी, उस समय मदद के लिए समाजसेवियों और मुस्लिम नेताओं ने प्रधानमंत्री कार्यालय में फोन किया तो वहां से कोई राहत नहीं मिल पाई थी। तत्काल यह लोग राहत के लिए राष्ट्रपति डॉ. शर्मा के पास पहुंच गए, लेकिन उनसे मिलने वाले लोग यह देखकर हैरान थे कि उनके सामने देश का राष्ट्रपति फूट-फूटकर रो रहा है। वे सभी लोग बाबरी ढांचे के मामले में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग करने आए थे। इस पर डॉ. शर्मा ने उन्हें एक पत्र दिखाया, जो उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को लिखा था।

डॉ. शर्मा ने पत्र में नरसिम्हा राव से कहा था कि उत्तरप्रदेश की सरकार को बर्खास्त कर सुरक्षा व्यवस्था को केंद्र सरकार अपने हाथों में लें। फिर शर्मा ने आसपास मौजूद लोगों से कहा कि मैं भी प्रधानमंत्री राव तक नहीं पहुंच पा रहा हूं।

नरसिंहराव कर रहे थे बंगले में आराम
कहा जाता है कि डॉ. शर्मा ने प्रधानमंत्री बनने से इनकार किया था, तभी नरसिम्हाराव को यह पद मिल सका था। उस समय डॉ. शर्मा अस्वस्थ्य रहते थे। हालांकि 2013 में समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह के एक बयान ने सभी को चौंका दिया था कि राष्ट्रपति को बाबरी ढांचा गिराए जाने की जानकारी पहले ही मिल गई थी। इस बयान पर काफी विवाद भी हुआ था। उसी दिन जब राष्ट्रपति डॉ. शर्मा प्रधानमंत्री नरसिंहराव से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे तो बंगले में आराम कर रहे थे।

देश के 9वें राष्ट्रपति थे डॉ. शंकर दयाल शर्मा
19 अगस्त 1918 को जन्मे डॉ. शंकर दयाल शर्मा देश के 9वें राष्ट्रपति बने थे। इनका कार्यकाल 25 जुलाई 1992 से 25 जुलाई 1997 तक रहा। राष्ट्रपति बनने से पहले वे भारत के 8वें उपराष्ट्रपति भी थे। डॉ. शर्मा भोपाल राज्य के मुख्यमंत्री (1952-1956) रहे और मध्यप्रदेश राज्य में कैबिनेट स्तर के मंत्री के रूप में उन्होंने शिक्षा, विधि, सार्वजनिक निर्माण कार्य, उद्योग तथा वाणिज्य मंत्रालय का कामकाज संभाला। केंद्र सरकार में वे संचार मंत्री (1974-1977) भी बने। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष (1972-1974) भी रहे। 26 दिसंबर 1999 को उनका निधन हो गया था।

Published on:
19 Aug 2017 06:14 pm
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