
Bhopal news: एमपी में इंजीनियरिंग की डिग्री के बाद बड़ी आईटी कंपनी में नौकरी पाने का सपना देख रहे विद्यार्थियों में इस बार प्लेसमेंट की चिंता बढ़ी है। अमेरिका में आठ बड़ी तकनीकी कंपनियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर कार्रवाई के बाद आईटी क्षेत्र में भर्ती के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसका असर मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) जैसे संस्थानों के विद्यार्थियों की उम्मीदों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, अमेरिकी फैसले से इन संस्थानों के कैंपस प्लेसमेंट पर सीधे असर की अभी पुष्टि नहीं हुई है। कैंपस प्लेसमेंट की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए बड़ी कंपनियों में चयन करियर की शुरुआत का अहम पड़ाव होता है। ऐसे में कंपनियों की भर्ती नीति में संभावित बदलाव, उपलब्ध पदों की संख्या और नई तकनीकों की बढ़ती मांग उनके लिए महत्वपूर्ण हो गई है। विद्यार्थियों के सामने अब बेहतर तकनीकी कौशल विकसित करने के साथ नौकरी के अधिक विकल्प खुले रखने की चुनौती भी है।
मैनिट और ट्रिपल आईटी में पढने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ी आईटी कंपनियों में नौकरी पाना प्रमुख लक्ष्य रहता है। अमेरिकी बाजार में नीतिगत बदलाव का असर यदि भारतीय कंपनियों की व्यावसायिक रणनीति पर पड़ता है, तो भविष्य में भर्ती की जरूरतों में भी बदलाव आ सकता है। हालांकि एक्सपर्ट के अनुसार ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर कार्रवाई का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित कंपनियों ने भारत में कैंपस भर्ती रोक दी है। इसका वास्तविक असर कंपनियों के फैसलों और आने वाले प्लेसमेंट सत्रों से ही स्पष्ट होगा।
मैनिट की प्लेसमेंट अधिकारी अरुणा सक्सेना का कहना है कि अमेरिकी फैसले का प्लेसमेंट पर कितना असर होगा, इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। आने वाला समय ही स्थिति स्पष्ट करेगा। उन्होंने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट ने प्लेसमेंट के अवसर कम किए हैं और इस बार मैनिट में कंपनी कैंपस प्लेसमेंट के लिए नहीं आई है। देश के कुछ चुनिंदा तकनीकी संस्थानों में ही कंपनी माना जा सकता। कैंपस भर्ती के लिए पहुंच रही है। हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट के मैनिट नहीं आने को अमेरिकी फैसले का सीधा परिणाम नहीं
ट्रिपल आईटी के प्लेसमेंट अधिकारी डॉ. अजय श्रीवास्तव के अनुसार, आने वाले समय में अमेरिकी फैसले का असर भारतीय कंपनियों पर भी पड़ सकता है। कंपनियों को अमेरिकी बाजार से इतर दूसरे बाजारों में अपनी स्थिति मजबूत करने की जरूरत पड़ सकती है। इसका प्रभाव भविष्य में भर्ती और कैंपस प्लेसमेंट पर भी देखने को मिल सकता है। विद्यार्थियों के लिए केवल डिग्री के भरोसे रहना पर्याप्त नहीं होगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, डेटा विश्लेषण और नई तकनीकों से जुड़ा व्यावहारिक ज्ञान रोजगार के अवसर बढ़ाने में मददगार हो सकता है।