
MP Village Tax Collection: एमपी के गांवों से टैक्स वसूली के लिए बन सकता है नया आयोग (फोटो सोर्स- Pexel)
MP Village Tax Collection:मध्यप्रदेश में पंचायतों की टैक्स लगाने और उसकी वसूली के प्रति उपेक्षा से केन्द्र से मिलने वाला वित्त आयोग अनुदान संकट में पड़ सकता है। ग्राम पंचायतों के चुने हुए जनप्रतिनिधि कानून में राजस्व वसूली के अधिकार होने के बावजूद इसमें राजनीतिक हितों के कारण रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसे देखते हुए अब राज्य वित्त आयोग सरकार को एक अलग नियामक आयोग गठित करने का सुझाव देने जा रहा है। यह नियामक आयोग पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में लगने वाले टैक्स तय करेगा और उसकी वसूली भी करेगा। इससे सरपंच, उप सरपंच, सदस्यों आदि पर इसका सीधा असर नहीं होगा क्योंकि एक अलग ऑडी इसकी पूरी व्यवस्था संभालेगी। आयोग का मानना है कि अनुदान से पंचायत को संसाधन मिलते हैं, लेकिन अपनी आय बढ़ने से उनकी वित्तीय स्वतंत्रता बढ़ेगी।
केन्द्रीय वित्त आयोग ने अपनी सिफारिश में स्पष्ट कहा है कि ग्राम पंचायतों को रूरल लोकल बॉडी निष्पादन घटक का अनुदान पाने के लिए साल में अपने संसाधनों से जुटाए जाने वाले राजस्व में 1.025 गुना वृद्धि करनी होगी। यह राशि प्रति वर्ष पति परिवार कम से कम 1200 रुपए होनी चाहिए। यह प्रावधान वर्ष 2028-29 से लागू होगा। तब तक ग्राम पंचायतों को अपने संसाधनों से राजस्व बढ़ाना होगा, नहीं तो अनुदान अटक सकता है।
आयोग ने यह भी पाया है कि पंचायतों के पास पंचायत भवन के अलावा अपनी कोई जमीन नहीं होती है। पूरी जमीन राजस्व और नजूल की होती है। इस पर वे कुछ काम नहीं कर सकते हैं। इसके लिए शासन की अनुमति जरूरी होती है। इसके लिए भी आयोग अब पंचायतों को कमर्शियल उपयोग वाली कुछ जमीन दिए जाने की सिफारिश भी करने जा रहा है ताकि वे वहां दुकानें बनवाकर या अन्य कोई व्यावसायिक उपयोग कर राजस्व अर्जित कर सकें।
राज्य वित्त आयोग द्वारा अध्यक्ष जयमान सिंह पवैया के नेतृत्व में लगातार प्रदेश के विभिन्न जिलों के दौरे किए जा रहे हैं और वहां नगरीय और ग्रामीण निकायों के प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बैठकें की जा रही हैं। इसमें यह बात निकलकर सामने आई कि ग्राम पंचायत यदि लोगों से टैक्स वसूली के लिए सख्ती शुरू कर दे तो सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधियों का अगला चुनाव जीतना मुश्किल हो जाता है। इसके साथ आपसी वैमनस्य भी बढ़ता है। इसलिए वे इसमें ज्यादा रुचि नहीं दिखाते हैं। इसके साथ गांवों के लोगों के पास पैसा होने के बावजूद उनमें टैक्स देने की प्रवृत्ति कम होती है। इस प्रवृत्ति को सुधारना अब केन्द्रीय वित्त आयोग की रिपोर्ट के कारण भी जरूरी हो गया है। इसलिए राज्य वित्त आयोग ने जनप्रतिनिधियों के सुझावों के आधार पर पंचायतों की टैक्स वसूली बढ़ाने के लिए नियामक आयोग बनवाने की पहल करने की सिफारिश की जाएगी।
मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम में ग्राम सभा और पंचायत को अनिवार्य और वैकल्पिक कर लगाने का अधिकार दिया गया है। अनिवार्य कर में हर घर से संपत्ति कर, जहां ग्राम सभा की एजेंसी शौचालय की सफाई करती है यहां पर निजी शौचालय कर और गांव में प्रकाश व्यवस्था किए जाने पर प्रकाश कर वसूलने का अधिकार है। वहीं वैकल्पिक करों में सवारी, बोझ ढोने या अन्य निर्धारित कार्यों में इस्तेमाल होने वाले धर्मशाला, विश्रामगृह और शिविर स्थलों से शुल्क वसूली कर सकते हैं।
Updated on:
15 Oct 2026 07:30 am
Published on:
15 Oct 2026 07:30 am
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