
साइबर नेटवर्क, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)
Bhopal news:मध्यप्रदेश में साइबर ठगी का जाल अब स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। बल्कि ठगी की रकम का कनेक्शन श्रीलंका, दुबई और कंबोडिया तक पहुंचने के संकेत मिले है। 10 जिलों में दर्ज 15 से ज्यादा केस में डिजिटल फुटप्रिंट और मनी ट्रेल की पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है। जांच में डिजिटल लेनदेन के रास्तों, संदिग्ध बैंक खातों और रकम के ट्रांसफर की कड़ियों को खंगाला गया। पता चला कि साइबर ठगी करने वाले छोटे-छोटे प्यादों के पीछे एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क काम करता है।
ग्वालियर साइबर क्राइम विंग ने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई में 1 लैपटॉप, 2 टैबलेट, 19 मोबाइल फोन, 17 एटीएम कार्ड, 4 पासबुक, १ चेकबुक एवं 38 सिम कार्ड जब्त किए हैं। जांच में नेटवर्क के दुबई, कंबोडिया एवं श्रीलंका से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों एवं अपराधों में उनकी भूमिका की जांच जारी है। इसके अलावा देवास, कटनी, गुना सहित कई जिलों में कार्रवाई के दौरान पुलिस को विदेशी इनपुट मिले है।
ठगी की रकम सीधे विदेश भेजने के बजाय कई बार पहले भारतीय बैंक खातों में मंगाई जाती है। इसके बाद अलग-अलग खातों और भुगतान माध्यमों से रकम आगे भेजी जाती है। इससे ठगी के मूल लेनदेन और अंतिम लाभार्थी के बीच कई कड़ियां बन जाती हैं।
ठग दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे खाते कमीशन के लालच में उपलब्ध कराए जा सकते हैं या धोखाधड़ी से हासिल किए जा सकते हैं। इन खातों के जरिए रकम आगे भेजने पर वास्तविक संचालक की पहचान करना कठिन हो जाता है।
साइबर ठगी में अलग-अलग देशों में बैठे लोग अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा सकते हैं। कोई लोगों को ठगता है, कोई बैंक खातों का इंतजाम करता है और कोई रकम को आगे पहुंचाता है। ऐसे नेटवर्क में विदेशी खाते पैसे को देश से बाहर ले जाने की एक कड़ी बन सकते हैं।
भारत में पुलिस संदिग्ध बैंक खातों पर होल्ड लगवाने और रकम वापस कराने के लिए बैंकों के साथ समन्वय करती है। लेकिन रकम दूसरे देश में पहुंचने पर संबंधित विदेशी बैंक, वहां के कानून और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग की जरूरत पड़ सकती है। इससे जांच और पैसे की रिकवरी जटिल हो सकती है।
ठगी की रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में कई खातों में भेजना या अलग-अलग लेनदेन के जरिए आगे बढ़ाना भी पैसे के वास्तविक प्रवाह को छिपाने का तरीका हो सकता है। जांच एजेंसियां इसी कारण मनी ट्रेल का विश्लेषण करती हैं।
Updated on:
15 Oct 2026 09:40 am
Published on:
15 Oct 2026 09:40 am
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