रीवा संसदीय क्षेत्र में विधानसभा चुनाव में एकतरफा जीत से बढ़ा उत्साह
रीवा. केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार होने के बाद भी सांसद जनार्दन मिश्रा नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट को रफ्तार नहीं दिला पाए। रीवा-सतना, मनगवां-इलाहाबाद, बेला-जबलपुर हाइवे के निर्माण कार्य धीमा है। मोदी लहर में 1.68 लाख वोटों से जीते मिश्रा विवादों में भी रहे हैं। अपनी ही पार्टी की तत्कालीन विधायक नीलम मिश्रा से उनकी ठनी तो विवाद सड़क तक आ गया। इसे सुलझाने के लिए पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार चौहान को रीवा आना पड़ा था। फिर भी हाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सभी आठों सीटें जीतकर राह आसान की है, लेकिन किसानों की नाराजगी और बेरोजगारी के मुद्दे भाजपा को असहज कर रहे हैं। पार्टी 2009 में बसपा से यह सीट हार गई थी।
संसद से लेकर गांव तक जनार्दन एक ही लहजे में नजर आए। सबसे बड़ी पहचान स्वच्छता के नाम पर बनाई। जिले में जहां भी गए सबसे पहले शौचालय देखा और सफाई की। शहर में रिक्शा लेकर डोर-टू-डोर संपर्क कर इसे जन अभियान बनाया। तीन रेल परियोजनाओं को मंजूरी मिली, लेकिन इन्हें पूरा लंबा वक्त लगेगा।
- अप्रत्याशित परिणामों के लिए जाना जाता है रीवा
रीवा लोकसभा से कई बार अप्रत्याशित परिणाम आए हैं। शुरुआती चुनाव में कांग्रेस का दबदबा रहा। महाराजा मार्तंड सिंह भी दो बार निर्दलीय जीते, लेकिन उन्हें 1977 में नेत्रहीन रहे यमुना प्रसाद शास्त्री ने हरा दिया। 1991 में प्रदेश में पहले बसपा सांसद भीम सिंह पटेल को जीत हासिल हुई। इसके बाद से बसपा ने यहां से तीन चुनाव जीते। भाजपा को केवल तीन बार ही जीत हासिल हुई है। 2014 में मिश्रा मैदान में उतरे तो कांग्रेस से सुंदरलाल तिवारी और बसपा से तत्कालीन सांसद देवराज पटेल सामने थे। मिश्रा 1.68 लाख वोटों से जीते थे।
- ये रहीं कमियां
युवाओं को रोजगार और खेती को लाभ का धंधा नहीं बना पाए। मुंबई तक ट्रेन चलाने का संकल्प लिया था पर ऐसा नहीं कर पाए। शिक्षा, स्वास्थ्य पर भी संस्थान नहीं मिले। पूर्व से सुपरस्पेशलिटी ब्लॉक के चल रहे निर्माण को ही उपलब्धि बताते रहे। रीवा को स्मार्ट सिटी में शामिल नहीं करा पाए।
- विधानसभा चुनाव परिणाम ने दी ऊर्जा
विधानसभा चुनाव में पहली बार रीवा से सभी आठ सीटें भाजपा के खाते में गई हैं। इसे सांसद मोदी सरकार की उपलब्धि से जोड़ते हैं। भाजपा को 4,19,720 और कांग्रेस को 3,20,995 वोट मिले। भाजपा को लोकसभा क्षेत्र में 98725 वोटों की बढ़त हासिल हुई है।
- संसद में बोली बघेली
सांसद लोकसभा में 303 दिन उपस्थित और 28 दिन अनुपस्थित रहे। उन्होंने 149 सवाल लगाए और 37 डिबेट में हिस्सा लिया। रेलवे लाइन, स्वास्थ्य के साथ ही किसानों की समस्याओं को लेकर कई बार बोले। आवारा मवेशियों से किसानों को परेशानी पर बघेली में कहा कि इस समस्या के समाधान के साथ ही कृषि बीमा में राज्य सरकारों को भी अधिकार दिया जाए।
सांसद बंद लिफाफे की तरह चुने गए, जिनकी उपलब्धियां अब तक पता नहीं चल पाई हैं। जो जिम्मेदारी थी, उसे नहीं निभाया।
- यजमान साकेत, मनगवां
केंद्र में भाजपा की सरकार होने के बावजूद जिले को सांसद कुछ दिला नहीं पाए। युवा रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं। प्रदेश में सबसे अधिक आत्महत्याएं रीवा के किसान कर रहे हैं।
- दशरथ सिंह, रिटायर्ड एसडीओ, बेलवा
सांसद ने पूरे पांच साल आम आदमी की तरह जनता के बीच समय बिताया। लोकसभा में रीवा की आवाज बुलंद करते रहे। रेलवे का विकास कराने के साथ ही तीन नेशनल हाइवे स्वीकृत कराए। मेडिकल कॉलेज को सुविधाएं दीं।
- अनिल कुमार पटेल, रीवा
35 साल पहले रेलवे के लिए अधिग्रहित भूमि के प्रभावितों को अब तक नौकरी नहीं मिली। जिले की सहकारी समितियों के भवन नहीं हैं, वेयर हाउस तक का इंतजाम नहीं करा पाए। खरीदी केंद्रों में किसान परेशान हो रहा है।
- सुब्रतमणि त्रिपाठी, किसान नेता