दीपकों की देश के कई शहरों में मांग
भोपाल. महिलाएं आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ अपना नाम भी रोशन कर रही है। दो साल पहले कोरोना आया तो महिलाओं ने घर बैठे गोबर से दीपक व प्रतिमाएं बनाना सीखा। अब यही काम उन्हें पैसों के साथ ही यश भी प्रदान कर रहा है. गोबर से बने दीपक और प्रतिमाएं खूब बिक रहीं हैं. अब तक 10 हजार से अधिक दीपकों की बिक्री हो चुकी है.
राधाकृष्ण मंदिर के सामने बरखेड़ी अहीर मोहल्ला में काशी दीप गौउत्पादन केंद्र द्वारा यह दीपक तैयार किए जा रहे हैं, जो दिवाली के लिए लागत मूल्य पर लोगों को उपलब्ध कराए जाएंगे। कांता यादव ने बताया कि इसके पीछे उद्देश्य यहीं है कि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा मिले इसके लिए पड़ौस की ही कुछ महिलाओं के साथ मिलकर दीपक सहित कुछ सामग्री तैयार कर रहे हैं। यह दीपक गाय के गोबर से तैयार किए जा रहे हैं।
इसके साथ ही घरों में लगने वाले शुभ लाभ, लक्ष्मीजी, गणेशजी, सरस्वती जी सहित अन्य प्रतिमाएं भी तैयार की जा रही है। केंद्र की कांता यादव ने बताया कि दीपक की डिमांड कई जगहों से आ रही है। अब तक आगरा, नासिक, मुज्जफरपुर, शिमला आदि शहरों में दीपक भेजे गए हैं, इसके अलावा भी कई शहरों से डिमांड आ रही है। अब तक दस हजार से अधिक दीपक भेजे जा चुके हैं, साथ ही कई शहरों से भी डिमांड आ रही है।
सोशल मीडिया से प्रचार
महिलाओं द्वारा इसका प्रचार प्रसार सोशल मीडिया के माध्यम से किया गया। इसके लिए एक फेसबुक पेज केंद्र के नाम से बनाया गया जिसमें दीपकों के बारे में जानकारी दी गई। गोबर से बने दीपक 3 से 4 रुपए प्रति नग दिए जाते हैं, इसी प्रकार प्रतिमाएं 80 रुपए जोड़ी के हिसाब से दिए जाते हैं। इन महिलाओं का कहना है कि यह दीपक हम लागत मूल्य पर उपलब्ध कराएंगे।
ऐसे तैयार करते हैं गाय के गोबर से दीपक
गाय के गोबर से दीपक तैयार करने के लिए पहले गोबर को सुखाया जाता। इसके बाद उसे पीसकर उसका पाउडर बनाते हैं। उस पाउडर को बारिक छान लेते हैं, इसके बाद उसमें मैदा लकड़ी पाउडर अथवा ग्वारगंभ मिलाते हैं। इसके बाद इसे आटे जैसा मल लिया जाता है। इसके बाद इससे दीपक तैयार किए जाते हैं। जिस हिसाब से मिट्टी के दीपक आते है, लगभग उसी कीमत पर यह गोबर के दीपक भी उपलब्ध होंगे।