
भोपाल. भोज मुक्त विश्वविद्यालय परिसर के कुलपति आवास में बाघ आया था। इसकी पुष्टि सोमवार को सामने आए सीसीटीवी फुटेज से हुई है। ऐसा पहली बार है कि कोलार रोड तक आधिकारिक रूप से बाघ की उपस्थिति दर्ज हुई है। बाघ का मूवमेंट सामने आते ही वन विभाग की समरधा रेंज के अधिकारियों-कर्मचारियों सहित क्रेक टीम ने मौके का मुआयना किया और बाघ के आने-जाने के रास्ते का पता लगाने की कोशिश की, लेकिन कुलपति निवास के अलावा कहीं पर भी बाघ के पगमार्ग नहीं मिल सके।
भोज विवि तक बाघ आने की पुष्टि के बाद वन विभाग की टीम ने कुलपति आवास से लेकर कलियासोत नदी के डाउनस्ट्रीम और वाल्मी में सभी संभावित जगहों पर तलाशी की। लेकिन बाकी जगहों पर चट्टानी इलाका होने के चलते पगमार्ग नहीं मिल पाए। विशेषज्ञों का अनुमान है कि बाघ वाल्मी की ओर से आया और रात एक बजे कुलपति जयंत सोनवलकर के आवास में से होते हुए टूटी हुई जाली के रास्ते बाहर निकला। जाली में बाघ के बाल भी फंसे मिले हैं। वहीं इसके कोलार रोड तक आने के बारे में सामान्य रूप से आकर लौट जाने से लेकर नया इलाका तलाशने की कोशिश तक की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
शहर के आसपास के जंगलों में 18 बाघ
शहर के आसपास के जंगलों में लगभग 18 बाघ भ्रमण कर रहे हैं जबकि कलियासोत केरवा के जंगलों में चार बाघों का आना जाना है। इस इलाके की प्रमुख बाघिन टी-123 तो यहां है ही इसके साथ ही उसके दो शावक जो अब लगभग ढ़ाई साल के हो चुके हैं, भी यहां इलाका बांट रहे हैं। इसके अलावा रातापानी अभ्यारण्य से एक व्यस्क बाघ का मूवमेंट भी इस क्षेत्र में देखा गया है।
--------
बाघ के आने की पुष्टि होने के बाद विवि परिसर सहित पूरे इलाके में सघन जांच की गई है। इसके अलावा इस इलाके में गश्त भी बढ़ा दी गई है। शुक्रवार रात के फुटेज सामने आने के बाद से शनिवार या रविवार रात तक कोई मूवमेंट दर्ज नहीं हुआ है। बाघ कहां से क्यों आया, सभी संभावित बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
- आलोक पाठक, डीएफओ
कलियासोत के संरक्षित वन क्षेत्र में नगर वन बनाने के नाम पर मशीनों का शोर हो रहा है वहीं वाल्मी में भी फेंसिंग लगाकर जो वन्य प्राणियों के वाल्मी अपने इलाके में और वन विभाग, नगर वन क्षेत्र में बाघ नहीं होने की बात कहता है, इस घटना से पता चलता है कि न केवल नगर वन इलाके में बल्कि वाल्मी के अंदर भी तेंदुए सहित बाघ का भ्रमण क्षेत्र है। इन प्राकृतिक आवासों से खदेड़े जाने के चलते लगातार तेंदुए और बाघ शहरों की ओर आ रहे हैं। मैं इस मुद्दे को पहले से उठा रहा हूं कि कलियासोत में सरंक्षित वन क्षेत्र को अक्षुण्ण रखा जाना चाहिए और इनके प्राकृतिक रहवास में गतिविधियां बंद कर दी जानी चाहिए।
राशिद नूर खान, पर्यावरण कार्यकर्ता