Wheat- शाम 6 बजे की बजाए रात 10 बजे तक बनेगी पर्ची, 7.48 लाख किसानों से 39.02 लाख मीट्रिक टन गेहूं का हुआ उपार्जन
Wheat- एमपी में गेहूं खरीदी में किसानों को बड़ी सुविधा दी गई है। इसमें तौल पर्ची बनाने का समय बढ़ा दिया गया है। प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक कर दिया गया है। इसके साथ ही देयक जारी करने का समय रात 12 तक तय किया है। मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया कि खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अभी तक 39 लाख 2 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। 7 लाख 48 हजार किसानों से यह गेहूं खरीदा गया है। इसके साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई है।
एमपी में अभी तक 14 लाख 75 हजार किसानों द्वारा गेहूं उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए गए हैं। किसानों के हित में गेहूं उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की जा चुकी है। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई है तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय भी लिया गया।
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि किसानों को उनके बेचे गए गेहूं का 6490.56 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है।
प्रदेश में किसानों से 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित कुल 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूं के लिए जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूं का सुरक्षित भंडारण किया जा सके।