
Transport network: ट्रेन, बस या फ्लाइट की टिकट एक ही प्लेटफॉर्म से बुक करने की सुविधा आज उपलब्ध है, लेकिन यात्रा के दौरान अलग-अलग परिवहन साधनों के बीच तालमेल की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी समस्या को दूर करने के लिए देश में पहली बार ऐसी व्यापक मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट इंटीग्रेशन गाइडलाइंस तैयार की जा रही है, जिनका उद्देश्य पूरे परिवहन नेटवर्क को एक-दूसरे से जोड़ना है।
भारत सरकार के लिए तैयार हो रही इन गाइडलाइंस पर भारतीय सड़क कांग्रेस (आइआरसी) की जी-6 समिति काम कर रही है। आइआरसी जी-6 समिति में शामिल मैनिट के परिवहन विशेषज्ञ डॉ. राहुल तिवारी इस समिति में तकनीकी सुझाव देने, नीति का मसौदा तैयार करने और ट्रांसपोर्ट इंटीग्रेशन मॉडल विकसित करने का काम कर रहे हैं। समिति देश के लिए ऐसा फ्रेमवर्क विकसित कर रही है, जिसके आधार पर रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल, मेट्रो स्टेशन, एयरपोर्ट और स्थानीय परिवहन सेवाएं एकीकृत रूप से काम कर सकेंगी।
डॉ. तिवारी ने बताया कि यह परियोजना किसी नए टिकटिंग ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रांसपोर्ट सिस्टम के बीच वास्तविक समन्वय स्थापित करना है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी यात्री की ट्रेन देर से पहुंचती है तो आगे की बस, मेट्रो या अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की जानकारी और कनेक्टिविटी स्वतः उपलब्ध हो सकेगी। यात्री को अलग-अलग सिस्टम में जानकारी तलाशने या अनावश्यक इंतजार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
नई नीति केवल संचालन व्यवस्था तक सीमित नहीं होगी, बल्कि भविष्य में बनने वाले ट्रांसपोर्ट हब, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और मेट्रो कॉरिडोर की डिजाइनिंग और लोकेशन प्लानिंग भी इसी मॉडल के अनुसार की जा सकेगी। इससे यात्रियों को एक साधन से दूसरे तक पहुंचने में कम समय लगेगा।
शहर में करोंद से मिसरोद, रत्नागिरी से भदभदा, कोलार से गांधीनगर के बीच दूरी घटेगी। पूरे शहर में लास्ट माइल कनेक्टिविटी यानी मकान दुकान, बाजार, अस्पताल, स्टेशन, गार्डन और दफ्तरों तक पहुंचने लायक रोड नेटवर्क बेहतर किया जाएगा। एमपीआरडीसी शहर में हो रहे विस्तार और इन्हें आपस में कनेक्ट करने 200 किमी. सड़कों का अंदरुनी नेटवर्क तैयार करेगा। प्रदेश के बाकी शहरों में भी प्रोजेक्ट लागू किया जा रहा है। मप्र सड़क विकास निगम ने सड़कों के डिजिटल सर्वे के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। भोपाल में 200 किमी सड़कें शामिल है।
सर्वे वीकल तकनीक से सड़कों की मोटाई, गड्ढों की स्थिति, पुलों की मजबूती और ट्रैफिक के दबाव का लाइव डेटा तैयार किया जाएगा। ये सरकार के रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ेगा, जिससे इन सड़कों के री-डेवलपमेंट को लेकर नए सिरे से योजना बनाई जाएगी। इसमें नवविकसित क्षेत्रों के साथ नई सड़कों पर फोकस रहेगा। जिले में नए क्षेत्र में हुई डेढ़ लाख की बसाहटों को नई सड़कें बनने की उम्मीद बनेगी। इस समय नीलवड, कलखेड़ा, रातीबड़ से आगे से लेकर नरसिंहगढ़ रोड पर श्यामपुर दोराहा और भौरी के आगे तक नई बसाहटें हैं।