
रेलवे पुलिस ने १० अगस्त को मुख्य रेलवे स्टेशन से ५३ दुर्लभ कछुए लावारिस बैग में बरामद किए थे। मामले की जांच करते हुए वन विभाग की एसटीएसएफ ने अक्टूबर के पहले सप्ताह में उन्नाव निवासी रुखसाना को गिरफ्तार किया।
रुखसाना की निशानदेही पर भोपाल के दो व्यापारी भी गिरफ्तार हुए । तस्कर रुखसाना और दोनों व्यापारियों को सेंट्रल जेल भेज दिया गया। इस बीच मुरुगेशन के साथी तपस को भी एसटीएसएफ ने फरवरी में गिरफ्तार कर लिया। तपस को पहले से सागर में जेल में बंद तस्कर मुरुगेशन के साथ रखा गया।
लेकिन इतनी गिरफ्तारियों के बावजूद चम्बल कछुए मुरुगेशन तक कैसे पहुंचते थे इसकी कड़ी नहीं मिल पा रही थी। अक्टूबर में रुखसाना की गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की गई तो उसने बताया कि वह कोलकाता में किसी तपस को दुर्लभ कछुए सौंपती थी।
यह जानकारी सामने आते ही जांच अधिकारियों की बांछे खिल गई। आठ से १२ अप्रेल की रिमांड लेकर तपस को भोपाल लाकर उसका सामना रुखसाना से कराया गया तो सारी कडि़यां मिल गई। अब वन विभाग के लिए इस पूरे गिरोह के तस्करी के तरीके को अदालत में प्रमाणित करना आसान हो गया है।