
Bhopal Twisha Sharma Case: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा केस में गिरिबाला सिंह भोपाल में कोर्ट की कार्यवाही को प्रभावित कर सकती हैं। सीबीआई ने ये बात सुप्रीम कोर्ट में दायर ट्विशा शर्मा के पिता की याचिका के समर्थन में कही है। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी तरफ से पेश किए गए हलफनामे में ये भी कहा है कि भोपाल में निष्पक्ष और स्वतंत्र सुनवाई संभव नहीं है, ऐसे में इस जांच को मध्य प्रदेश से बाहर ट्रांसफर करना ही सही रहेगा। बता दें कि ट्विशा शर्मा के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ट्विशा शर्मा की मौत के केस की ट्रायल को भोपाल से दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की है।
ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए केस की ट्रायल भोपाल से दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सीबोआई ने भी अपना हलफनामा दाखिल किया है। हलफनामे में सीबीआई ने ट्विशा के पिता की याचिका का समर्थन करते हुए कहा है- ट्विशा शर्मा की सास और आरोपी गिरिबाला सिंह पूर्व जिला जज हैं और काफी प्रभावशाली हैं। ऐसे में भोपाल में निष्पक्ष और स्वतंत्र सुनवाई संभव नहीं है, वो अपने प्रभाव से ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में इस जांच को मध्य प्रदेश से बाहर ट्रांसफर करना ही सही रहेगा।
बता दें कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के साथ ही आरोपी समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को भी नोटिस जारी किया था और दो हफ्ते में जवाब मांगा था। यहां ये भी बता दें कि इसी महीने सुप्रीम कोर्ट ने ट्विशा शर्मा केस में भोपाल ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक भी लगा दी थी। हालांकि बीते दिनों 26 अक्टूबर को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में आरोपी सास गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई थी। सोमवार को कोर्ट में गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर अंतिम बहस हुई, इस दौरान गिरिबाला सिंह के वकीलों ने सीबीआई की चार्जशीट में शामिल बिंदुओं पर जवाब प्रस्तुत किए। इसके बाद सीबीआई ने अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गिरिबाला की जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा है।
नोएडा की रहने वाली ट्विशा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह के वकील बेटे समर्थ सिंह के साथ हुई थी। महज चंद माह बाद ही 12 मई 2026 की रात को ट्विशा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। गिरिबाला और समर्थ सिंह रात को ही एम्स भोपाल लेकर पहुंचे, जहां ट्विशा को मृत घोषित कर दिया गया था। इसके बाद मामला तब उलझा जब गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह पर सबूत नष्ट करने के आरोप लगे। आरोप है कि उन्होंने काफी समय न्यायिक अधिकारियों और पुलिस के बड़े अफसरों को फोन लगाकर मामला प्रभावित करने का प्रयास किया। ट्विशा के परिवार और ससुराल पक्ष के आरोप-प्रत्यारोप और लड़ाई में करीब 12 दिन तक ट्विशा का शव एम्स की मार्चुरी में रखा रहा। बाद में 25 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: मामले पर संज्ञान लिया और इसके बाद राज्य सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपी थी।