भोपाल

क्या पद पर बनी रहेंगी जिला उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष और ट्विशा की सास? जानें हटाने की क्या है कानूनी प्रक्रिया

Twisha Sharma Case Explainer: ट्विशा शर्मा केस में सास और पूर्व जिला जज है उपभोकता फोरम की अध्यक्ष, इस मामले में है संदिग्ध भूमिका, क्या अब भी पद पर बनीं रहेंगी, या देंगी इस्तीफा, या फिर हटाई जाएंगी? जानें क्या है उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष को हटाने की कानूनी प्रक्रिया
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Updated: 21 May 2026, 12:43 PM IST
Twisha Sharma Case consumer commission chairperson removal legal process Explainer
Twisha Sharma Case: जिला उपफोक्ता आयोग में अध्यक्ष हैं ट्विशा की सास गिरिबाला, हाईप्रोफाइल मामले में संदिग्ध है में इनकी भूमिका, अब सवास क्या पद पर बनीं रहेंगी, इस्तीफा देंगी या फिर हटाई जाएंगी, जानें क्या है कानूनी प्रक्रिया? (photo: patrika creative)

Twisha Sharma Case: हाईप्रोफाइल ट्विशा शर्मा केस ने इन दिनों मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक की हड़कंप मचा रखा है। लेकिन अब प्रदेश में सियासी और प्रशासनिक हलकों में भी मामले को लेकर भी हलचल तेज हो चुकी है। इस मामले में मृतका ट्विशा की सास जो वर्तमान में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (पूर्व में जिला उपभोक्ता फोरम) की अध्यक्ष हैं। अब ट्विशा के मामले को लेकर उनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। इस विवाद में अब कानूनी गलियारों में भी बहस तेज हो चुकी है कि क्या ऐसे गंभीर मामले में नाम आने और FIR दर्ज होने के बाद उन्हें पद से हटाया जा सकता है? पढ़ें patrika.com पर संजना कुमार का Explainer-

जानें क्या है नियम?

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और इसके तहत बनाए गए नियमों के मुताबिक जिला उपभोक्ता आयोग एक सिविल कोर्ट के समान अर्ध न्यायिक कोर्ट का दर्जा प्राप्त होता है। इसके अध्यक्ष आमतौर पर जिला न्यायाधीश स्तर के होते हैं। यही कारण है कि राज्य सरकार किसी भी अध्यक्ष को अपनी मर्जी से या किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव में आकर नहीं हटा सकती। यही नहीं जिला अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया बेहद सख्त और पारदर्शी पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया है।

किन नियमों के तहत हो सकती है कार्रवाई?

उपभोक्ता संरक्षण नियम, 2020 के मुताबिक किसी अध्यक्ष या सदस्य का कार्यकाल 4 वर्ष तक या फिर 65 वर्ष की आयु तक होता है। इससे पहले उन्हें एक विशेष प्रक्रिया के तहत ही हटाया जा सकता है। इसका प्रमुख आधार नैतिक अधमता वाले किसी अपराध में दोषी होना, अपने पद का दुरुपयोग करना या फिर ऐसा कोई गंभीर अपराध जो उनके पद पर बने रहते हुए जनहित या न्याय के खिलाफ है।

अब ट्विशा केस (Twisha Sharma Case) के संदर्भ में क्या?

हाईप्रोफाइल ट्विशा केस बेहद संवेदनशील है, इसलिए हटाने की कार्रवाई मुख्य रूप से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत और चरणबद्ध तरीके से ही आगे बढ़ाया जा सकता है।

1- प्राथमिक जांच और स्पष्टीकरण

यदि इस मामले के कारण पद के दुरुपयोग या कदाचार की शिकायत होती है, तो राज्य सरकार सबसे पहले उच्चस्तरीय जांच अधिकारी या समिति नियुक्त करेगी। इस दौरान संबंधित अध्यक्ष को भी अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाएगा।

2- हाईकोर्ट की अहम भूमिका

चूंकि यह एक न्यायिक गरिमामयी पद है इसलिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (MP High Court) के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा गठित की गई समिति की राय और जांच प्रक्रिया इस रिपोर्ट प्रक्रिया में सबसे निर्णायक साबित होगी। हाईकोर्ट की अनुशंसा के बिना सरकार कोई भी अंतिम फैसला नहीं ले सकती।

3- सरकार कब दे सकती है हटाने का अंतिम आदेश?


यदि जांच में यह साबित हो जाए कि मामले के चलते पद की गरिमा प्रभावित हुई है, तभी राज्य सरकार आधिकारिक तौर पर हटाने का आदेश जारी कर सकती है।

क्यों टिकी है इस पर सबकी नजरें?

मामले में भोपाल की एडवोकेट मीना अस्वाल का कहना है उपभोक्ता आयोग के अध्यक्षों को हटाना आसान नहीं है। यह एक सख्त कानूनी प्रक्रिया है। यह सुरक्षा इन्हें इसलिए दी जाती है ताकि वे बिना किसी दबाव के निष्पक्ष फैसले कर सकें। लेकिन जब खुद न्याय की कुर्सी पर बैठे व्यक्ति के परिवार पर इतने गंभीर आरोप लगें, तो जांच प्रभावित न हों, इसके लिए नियमों के तहत निलंबन या जांच पूरी होने तक पद से परे रहने का विकल्प तलाशा जा सकता है।

राज्यपाल को पत्र लिखकर गिरिबाला को आयोग के पद से हटाने की बात

उधर ट्विशा के पिता ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने राज्यपाल से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके अलावा उन्होंने गिरीबाला को भी उसके पद से हटाने की मांग की है।बताते चलें कि गिरिबाला वर्तमान में जिला उपभोक्ता आयोग भोपाल बेंच 2 की अध्यक्ष हैं।

ट्विशा के परिवार ने सास गिरिबाला पर लगाए हैं गंभीर आरोप

बता दें कि ट्विशा केस में पूर्व जिला न्यायाधीश और ट्विशा की सास गिरिबाला और उनके परिवार पर ट्विशा के परिवार ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हस्तक्षेप करने के आरोप लगाए हैं। वहीं परिवार के खिलाफ दहेज के लिए ट्विशा की हत्या किए जाने का गंभीर आरोप है। मामला तब और भी संदिग्ध हो चला है जब ट्विशा का पिता ने 40 से ज्यादा ऐसे मोबाइल नंबरों की लिस्ट जारी की है, जिन पर ट्विशा की मौत के अगले दिन 13 मई को लगातार और कई बार कॉल किए गए। इनमें कई जजों और सीसीटीवी का काम करने वाले व्यक्तियों से बातचीत करना बताया गया है। अगर यह मामला सही साबित होता है, तो ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह की भूमिका वाकई संदिग्ध है।

ऐसे में अब देखना होगा कि इस हाई प्रोफाइल ट्विशा केस में प्रशासन और माननीय उच्च न्यायालय का अगला कदम क्या रहता है।

Updated on:
21 May 2026, 12:43 PM IST
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