
Twisha Sharma Death Case: त्विशा केस में आरोपी गिरिबाला सिंह एक ऐसी महिला जिसने अपने न्यायिक प्रोफेशन में दर्जनों मामलों की सुनवाई की। न्याय के मंदिर में न्याय की देवी बनकर 39 दोषियों को सजा सुनाई। आज न्याय की वही देवी भोपाल सेंट्रल जेल की महिला बैरक में कैदी नंबर 71 के रूप में गिनी जा रही है। त्विशा के केस में आरोपी कैदी नंबर 71 गिरिबाला सिंह की दुनिया इन दिनों जेल की बैरक तक सिमटकर रह गई है।
गिरिबाला सिंह को 19 महीने पहले तक एक सम्मानित न्यायाधीश के रूप में जाना जाता था। अदालत उनके फैसलों का इंतजार करती थी। कानून, कानून की किताबों, केस डायरी और बहस-सुनवाई के बीच जीवन बिताकर वे रिटायरमेंट के बाद कुछ शांति से रहने लगी थीं। लेकिन गिरिबाला को क्या पता था कि यह शांति तूफान (Twisha Sharma Death Case) से पहले की थी। कैदी नंबर 71 बनी गिरिबाला को क्या पता था कि एक पारिवारिक त्रासदी आकर उनके सुख छीनकर उनकी जिंदगी की दिशा और दशा दोनों बदलकर रख देगी।
बता दें कि त्विशा शर्मा केस में अदालत ने गिरिबाला सिंह और उसके बेटे समर्थ सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Twisha Sharma Death Case) में भेजा है। मामले में कानूनी लड़ाई अभी जारी है और फैसला आना बाकी है।
जेल में रहकर दिन काट रही पूर्व जज गिरिबाला सिंह की दिनचर्या अब उनकी लाइफस्टाइल नहीं बल्कि, जेल के सख्त नियमों में बंधी है। वही बैरक, वही गिनती, वही निश्चित समय पर भोजन और सीमित निजी सामान। जेल सूत्रों के मुताबिक गिरिबाला सिंह के पास अब केवल एक कटोरी, एक चादर और एक शॉल है। यही सामान अब उनकी जिंदगी का हिस्सा है।
जानकारी मिल रही है कि महिला बैरक में कैदी 71 नंबर बनी गिरिबाला सिंह को रातभर नींद नहीं आई। वह रात भर करवटें बदलती हुई नजर आ रही है। चेहरा बुझा-बुझा सा है और जेल की व्यस्थाओं के खिलाफ नाराजगी। चिंता और बेबसी की लकीरें चेहरे पर साफ नजर आ रही हैं।
पूर्व जज और अब कैदी नंबर 71 के नाम से बैरक में कैद गिरिबाला सिंह की यह कहानी महज कानूनी कहानी (Twisha Sharma Death Case) नहीं बल्कि जीवन की अनिश्चितता और समय के फेर का एक उदाहरण भी है। जिस महिला ने सारी जिंदगी न्यायिक फैसले सुनाते और दोषियों को सजा देते काटी आज वही आरोपों से घिरी है और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बनी हुई है। त्विशा केस में खुद पर लगे आरोपों से बरी होने की उम्मीद में उसकी रात करवटें बदल गुजरी है। वह मानसिक रूप से इतनी परेशान है कि उनके साथ किया जा रहा आरोपियों सा व्यवहार उन्हें साल रहा है। वह सीबीआई पर खराब व्यवहार के आरोप लगा रही हैं, बुजुर्ग होने के नाते सुविधाओं की दरकार कर रही हैं।