
Umang Singhar : मध्यप्रदेश में कोरोना के सबसे कठिन दौर में कई लोग आगे आए जो अपनी जान जोखिम में डालकर आमजन की सेवा करते रहे। अब इन कोरोना योद्धाओं की ही हालत खराब है। संकट समाप्त होते ही राज्य सरकार ने उनकी सेवाएं खत्म कर दी थीं जिसके कारण ये आर्थिक रूप से परेशान हो चुके हैं। अब मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कोरोना योद्धाओं की आवाज उठाई है। उन्होंने राज्य सरकार से तत्काल इनके पुनर्नियोजन पर विचार करने को कहा है।
महामारी से बचाव के लिए राज्य सरकार ने कोरोना योद्धाओं की सेवाएं ली थीं। उन्होंने अपना दायित्व भी निभाया। संक्रमण फैलने से कोरोना से अपनी जान जाने के जोखिम के बावजूद काम पर डटे रहे। लेकिन महामारी का संकट खत्म होते ही राज्य सरकार ने कोरोना योद्धाओं को निकाल दिया। 1 अप्रैल 2022 से सरकार ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। इसके लिए बजट का हवाला दिया गया।
राज्य सरकार के इस फैसले से प्रदेश के 4000 से अधिक कोरोना योद्धा प्रभावित हुए। उनके समक्ष रोजी रोटी का संकट उत्पन्न हो गया। बेरोजगारी और आर्थिक परेशानियों से उनकी हालत खराब हो चुकी है। आज उन्हीं कोरोना योद्धाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के भोपाल स्थित आवास पर भेंट कर अपनी समस्याएं सुनाईं। उन्होंने अपने पुनर्नियोजन की बात उठाई।
कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने कोरोना योद्धाओं की समस्याओं के निराकरण की राज्य सरकार से मांग की है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में मानव संसाधन की कमी है तो कोरोना काल का अनुभव रखने वाले इन स्वास्थ्यकर्मियों की सेवाओं का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा?
उमंग सिंघार ने पूछा कि जिन कोरोना योद्धाओं ने संकट में प्रदेशवासियों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली, उन्हें संकट खत्म होते ही बेरोजगारी के हवाले करना सरकार की कैसी कृतज्ञता है? उन्होंने कहा कि यदि आज यही कोरोना योद्धा सेवा में होते तो प्रदेश में हो रही मौतों को कुछ हद तक कम किया जा सकता था।
मुख्यमंत्री मोहन यादव से उमंग सिंघार ने कोरोना योद्धाओं के तत्काल पुनर्नियोजन पर विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का सम्मान, प्रमाण पत्र और भाषणों से नहीं बल्कि उनके अनुभव और योग्यता के आधार पर रोजगार देने से होगा।
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